मारवाड़ प्रजामण्डल

मारवाड़ प्रजामण्डल मारवाड में राजनीतिक चेतना जागृत करने की शुरुआत 1920 ई . में स्थापित ने की । इसके सदस्यों ने खादी प्रचार और विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार मे कार्यक्रम चलाये । मारवाड़ सेवा संघ ने मादा पशुओं की निकासी के विरुद्ध आंदोलन । जलाया । फलतः महाराजा को मादा पशुओं की निकासी पर पुनः प्रतिबंध लगाना पड़ा । 1927 ई . में जयनारायण व्यास ने ' मारवाड़ हितकारिणी सभा ' के बैनर तले राज्य में उत्तरदायी शासन स्थापित करने की माँग की तथा राज्य द्वारा समाचार पत्रों पर लगाये गये प्रतिबंध एवं जागीरदारों द्वारा किसानों पर किये जा रहे अत्याचारों की आलोचना की । फलत : 1929 ई . में व्यास और उनके सहयोगियों द्वारा अखिल भारतीय देशी राज्य
राज्य ने इन पुस्तकों कार्यकर्ताओं जयनारायण लेक परिवाना व्यास के शासन । ' लोक परिषद के जोधपुर में बुलाये जाने वाले अधिव मारवाड़ की अवस्था ' एवं ' पापावापा अत : जपनारायण व्यास पुस्तिकाएं लिखकर मारवाड़ के शासन की कट आलोचना की । राज्य नइन पर पर प्रतिबंध लगा दिया और मारवाड़ हितकारिणी सभा के प्रमुख कार्यकर्ताओंजयः व्यास , आनन्दराज सुराणा और भवरलाल सर्राफ को गिरफ्तार करके जेल भेजा मार्च , 1931 के गांधी - इविन समझौते के फलस्वरूप ये नेता जेल से रिहा , 10 मई , 1931 को जयनारायण व्यास ने ' मारवाड़ यूथ लीग ' की स्थापना इसके सदस्यों ने यादी प्रचार , विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार व शराब की दक धरना दिया तथा सरकार से उत्तरदायी शासन , नागरिक अधिकार देने की मांग जेल भेज दिया । जेल से रिहा हुए । लीग ' की स्थापना की । देने की मांग के साथ की । 24 - 25 नवम्बर को य लोक परिषद् का अधिवेशन साथ ताग - बाग एवं बेगार पर रोक लगाने की भी माग का । 24 - 25 नवर पादकरण शारदा की अध्यक्षता में पुष्कर में मारवाड़ राज्य लोक परिषद्का अनि हुआ , जिसमें कस्तूरबा , काका कालेलकर और मणिलाल कोठारी जैसे राष्ट्रीय ने भी शिरकत की । अधिवेशन में जागीरदारी अत्याचारों और राज्य की दमन नीति कर आलोचना की गई तथा उत्तरदायी शासन की स्थापना एवं नागरिक अधिकारों के में प्रस्ताव पास किए गए । 5 मार्च , 1932 को राज्य सरकार ने ' मारवाड़ दरबार पब्लिक सेफ्टी अध्यादेश जारी कर सभी प्रकार के आंदोलनों पर प्रतिबंध लगा दिया । 1934 ई . में छगनराज चौपासनी वाला , अभयमल मेहता एवं भंवरलाल साफ ने ' मारवाड़ प्रजामण्डल ' की स्थापना की और मारवाड़ में उत्तरदायी शासन की स्थापन एवं नागरिक अधिकारों की रक्षा अपना लक्ष्य घोषित किया । राज्य ने भाषण और सभ पर प्रतिबंध लगाते हुए जयनारायण व्यास को राज्य से निष्कासित कर दिया । ' कृष्ण ' मामले को लेकर प्रजामण्डल ने विरोध सभाओं का आयोजन किया । फलतः सरकार ने अगस्त , 1936 में प्रजामण्डल को अवैध घोषित कर दिया । जुलाई , 1936 में प्रजामण्डत ने राज्य द्वारा स्कूलों व कॉलेजों की फीस वृद्धि के विरोध में आंदोलन चलाया । सरकार ने फीस वृद्धि को निरस्त नहीं किया , मगर इससे जनता में जागरूकता बढ़ी । दिसम्बर 1937 में ' मारवाड़ की अवस्था ' नामक पुस्तक रखने के आरोप में छगनराज चौपाल याला और राज्य शासन के विरुद्ध प्रचार करने के अपराध में पुरुषोत्तम प्रसाद नया प्रजामण्डल को लोकप्रियता मिली । बंदी बनाकर कठोर कारावास की सजा दी गई । सरकार के इन दमनकारी कर हरिपुरा अधिवेश के पर मारवाड़ लोक परिषद - फरवरी , 1938 में कांग्रेस के हरिपुरा अधिव राज्य में उत्तरदायी शासन की स्थापना की माँग ने जोर पकड़ा । प्रजामण्डल लगा होने से मई , 1938 में रणछोड़दास गट्टानी की अध्यक्षता में ' मारवाद की स्थापना की गई । निर्वासित जयनारायण व्यास को इसका मुख्य उद गया । लोक परिषद् ने जागीरदारी प्रथा का विरोध करते हुए उत्तरदाया करने की मांग की । 1938 ई . में श्रीमती विजयलक्ष्मी पंडित और सु " जोधपुर आने से जनआंदोलन को बल मिला । 1939 ई . में जयनारायण व्यार प्रजामण्डल पर प्रतिया

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