भरतपुर प्रजामण्डल

भरतपुर प्रजामण्डल भरतपुर में जन चेतना जागृति का श्रेय ' आर्य समाज ' को है । 1920 ई . तक भरतपुर , डीग , कुम्हेर , भुसावर , नगर , बयाना , वल्लभगढ़ इत्यादि में आर्य समाज की शाखाओं और मंदिरों की स्थापना हो चुकी थी । जगन्नाथ अधिकारी ने भी ' हिन्दी साहित्य समिति 1012 ई . और ' वैभव ' नामक पत्र के द्वारा जनजागृति का कार्य किया । फलतः उसे दोह के आरोप में जेल जाना पड़ा । किसानों की मांगों को लेकर देशराज ने 1924 107 ई . तक अनेक सभाएँ की और किसानों की मांगों से सरकार को अवगत कराया , मगर सरकार उदासीन बनी रही । 1927 ई . में महाराजा कृष्णसिंह द्वारा उत्तरदायी शासन स्थापित करने की घोषणा करने पर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पदच्युत करके डंकन मैकेन्जी को शासन संबंधी अधिकार साँप दिये । मैकेन्जी ने सभाओं , जुलूसों और नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिया । मैकेन्जी की नीतियों के विरोध में नवम्बर , 1928 में ' भरतपुर राज्य प्रजा संघ ' की स्थापना की गई । गोपीलाल यादव को इसका अध्यक्ष और देशराज को सचिव बनाया गया । प्रजा संघ ने राजपूताना प्रांतीय देशी राज्य परिषद् का अधिवेश भरतपुर में करवाने की योजना बनाई तो प्रजा संघ के सचिव देशराज को गिरफ्तार कर लिया गया । जनता ने दीवान को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया । 1930 - 31 ई . में भरतपुर । में छात्रों ने स्वतंत्रता दिवस मनाया । सरकार ने पुलिस कार्यवाही द्वारा आंदोलन को दबाने का प्रयास किया । पं . नेहरू की प्रेरणा से 1937 ई . में भरतपुर में कांग्रेस मण्डल की स्थापना हुई । माच , 1938 में रेवाड़ी में ' भरतपुर राज्य प्रजामण्डल ' की स्थापना हुई , गोपीलाल यादव प्रजामण्डल का अध्यक्ष , ठाकर देशराज व रेवतीशरण उपाध्याय को उपाध्यक्ष बनाया गया । प्रजामण्डल ने पंजीकरण के लिए सरकार को आवेदन दिया , मगर सरकार ने माकरण से इनकार करते हुए इसे अवैध घोषित कर दिया । प्रजामण्डल ने भाषण व पर प्रतिबंध हटाने व उत्तरदायी शासन स्थापित करने की मांग करते हुए 21 अप्रैल , सत्याग्रह शुरू कर दिया । प्रजामण्डल ने किसानों को लगान नहीं चुकाने की का । प्रजामण्डल के नेताओं की गिरफ्तारियों व दमन के बावजूद जब आंदोलन वा राज्य ने 23 दिसम्बर , 1940 को प्रजामण्डल से समझौता कर लिया । वक बदियों को रिहा करते हए प्रजामण्डल का प्रजा परिषद् के नाम से या गया तथा भाषण , लेखन और सभाओं पर से प्रतिबंध हटा दिया । बर , 1940 से । जनवरी , 1941 तक प्रजा परिषद् का प्रथम राजनीतिक मजयनारायण व्यास की अध्यक्षता में हुआ । सम्मेलन में उत्तरदायी ना की मांग दोहराई गई128 से 30 दिसम्बर , 1941 काम एकदमा था राज्य ना पड़ा । जैसलमेर जा परिषद दिया गया दिया गया । गरमल गोपा 1939 को सत्याग्रह शुरू कर दिया में ' जैसलमेर भी अपील की । प्रजाम व गोपाको वक अत्याचार हिस का संचार कई कार्यकारी सलमेर में एक अक्र बर , 100 जिस पर पुलिस सभी राजनीतिक दिया पंजीकरण किया गया तथा 30 दिसम्बर , 1940 से । सध्यालेन भातपुर में जप शासन स्थापना काम

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