मेवाड़ प्रजामण्डल

 मेवाड़ प्रजामण्डल लिया किसान आन्दोलन ने किसानों के साथ - साथ मेवाड़ राज्य की सम्पूर्ण जागति उत्पन्न कर दी । जनता नागरिक अधिकारों एवं शोषण के खिलाफ कि होकर राज्य की नीतियों का विरोध करने लगी । 1932 से 1938 ई . तक कार्य एवं अनियमित करों की वसूली के विरोध में उदयपुर में प्रदर्शन हुए . मगर शेग्य नेतृत्व के अभाव में ये प्रदर्शन अपने उद्देश्य की परिणति तक न पहुँच सके । राज्य दारा विरोध को शक्ति से दबाने के बावजूद लोग अभिव्यक्ति एवं सभा - सम्मेलन करने की आजादी देने की मांग पर अड़े रहे । कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में रियासतों के राजनैतिक संगठनों को समर्थन देने का प्रस्ताव पारित होते ही माणिक्यलाल वर्मा , ओ भीलों के मध्य रचनात्मक कार्य में मलान थे , ने मेवाड राज्य का दौरा कर राजनैतिक संगठनों की पृष्ठभूमि तैयार की ।
उन्होंने उदयपुर पहुंच कर अपने साथियों से विचार - 14 . को बलवन्तसिंह मेहता के निवास पर मेवाड़ प्रजामण्डल ' की स्थापना मेहता को प्रजामण्डल का अध्यक्ष , भूरलाल बया को उपाध्यक्ष और महामंत्री बनाये गये । तीन दिन में उदयपुर शहर में प्रजामण्डल बनने से मेवाड़ सरकार चिन्तित हो गई और उसने माणिक्य लाल की स्थापना की स्वीकृति लेने का आदेश दिया । लेकिन वर्मा ने दो फलतः । । मई , 1938 को राज्य ने प्रजामण्डल को गैरकानूनी घोषित कर भाषणों और समाचार पत्रों पर प्रतिबन्ध लगा दिया तथा माणिक्य लाल की व्यास को मेवाड़ छोड़ने के आदेश दिए । अवैध सपना की । बलब और माणिक्यलाल मण्डल के दो हजार से लाल वर्मा को प्रदान मी ने इससे इन्कार कर दिया घोषित करते हुए सभः लाल वर्मा और रमेशवर भगवा 1944 आदेश प्राप्त कर अ की अ 31 दि अध्यक्ष माणिक्य लाल वर्मा वर्धा पहुंचे और वहां से गांधीजी का आदेश पालन में प्रजामण्डल का अस्थायी कार्यालय स्थापित किया । अजमेर से वर्मा ने वर्तमान शासन ' नामक पुस्तिका प्रकाशित की जिसमें मेवाड़ राज्य के शासन आलोचना की गई । सरकार ने प्रजामण्डल की आवाज को दबाने के उद्देश्य से प्रेमनार माथुर को राज्य से निष्कासित कर दिया । 30 सितम्बर को प्रजामण्डल के उपमा भूरेलाल बया को गिरफ्तार कर लिया । फलतः प्रजामण्डल ने विजयादशमी से सत्याना शुरू करने की घोषणा की , मगर इससे पूर्व राज्य सरकार ने बलवन्त सिंह मेहता । रमेशचन्द्र व्यास सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया और कई मेवा से निष्कासित कर दिये गए । राज्य सरकार की इस दमनात्मक कार्यवाही के विशेष में उदयपुर , भीलवाड़ा , चित्तौड़ , जहाजपुर , नाथद्वारा आदि स्थानों पर सभाएं हुई । नाथदरा । में महिलाओं ने भी आन्दोलन में भाग लिया और जेल गईं । 2 फरवरी , 1939 को माणिक्य लाल वर्मा को देवली से गिरफ्तार कर अमानुषिक यातनाएं दी गई । उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर दो वर्ष की सजा दी गदार में स्वास्थ्य खराब होने पर 8 जनवरी , 1940 को उन्हें मक्त कर दिया गया । की सलाह पर प्रजामण्डल ने सत्याग्रह स्थगित कर दिया । 22 फरवरी , 1947 में उत्त मेवाड़ कार्यका से युक्त नहीं वि जिसे 2 सरकार कोठारी चुनाव । महाराणा गोली से प्रश्न ह 1 22 फरवरी , 1941 को राज्य जामण्डल ने नागरिक अधिका कार्य जारी रखा । 25 - 3 माणिक्य लाल वर्मा किया । अधिवेशन में गन्न जयपुर ने किया न पूरे राज्य में शयर का कम करने के लि पाली व्यवस्थापिका भावना एवं श्या सरकार ने प्रजामण्डल पर लगा प्रतिबंध हय दिया । प्रजामण्डल ने नागार एवं उत्तरदायी शासन को स्थापना के लिये जनजागृति का कार्य जारी नवम्बर , 1941 को मेवाड़ प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन माणिक्या सभापतित्व में हुआ , जिसका उद्घाटन आचार्य कपलानी ने किया । आप में उत्तरदायी शासन स्थापित करने की मांग की गई । प्रजामण्डल ने पूर खोलकर जनजागृति का प्रयास किया । प्रजामण्डल के प्रभाव को कम मेवाड़ सरकार ने जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों के बहमत वाली स्थापित करने की घोषणा की । अगस्त , 1942 में ' भारत छोड़ो ' आन्दोलन के दौरान प्रजामण्डल का साथ छोड़ो ' नारा दिया ।

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