जयपुर प्रजामण्डल

जयपुर प्रजामण्डल राज्य में जन - जागृति का प्रथम सुव्यवस्थित प्रयास श्री अर्जुनलाल सेठी या । तत्पश्चात् जयपुर हितकारिणी सभा , आर्य समाज आदि ने भी युवाओं में राष्ट्रीय भावना उत्पन्न की । 1922 ई . में हिन्दी को राजभाषा बनाने के लिए ठाकुर कल्याणसिंह श्यामलाल वर्मा ने , चरखा संघ के माध्यम से जमनालाल बजाज ने भी जनजागति पैदा करने का प्रयास किया । सितम्बर , 1927 में जयपुर में भ्रष्ट शासन व नये करों के विरुद्ध प्रदर्शन हुआ । शासन द्वारा शक्ति का प्रयोग करने के बावजूद जनता की जागरूकता का दमन न हो सका । राज्य की दमन नीति का विरोध करने एवं नागरिक अधिकारों की स्थापना के लिए 1931 ई . में श्री कपूरचन्द पाटनी ने ' जयपुर प्रजामण्डल ' की स्थापना की । मगर उन्हें आवश्यक सहयोग नहीं मिला । 1937 ई . में जमनालाल बजाजी , केसों में महामण्डल का पुनर्गठन किया गया जिसका अध्यक्ष उपाध्यक्ष चिरंजीलाल मित्र , सचिव होरालाल शास्त्री और संयम , पाटनी को बनाया गया । जयपुर प्रजामण्डल ने महाराजा की छाछाया में को स्थापर नागरिक अधिकारों को स्थापना को अपना ले प्रमण्डल ने पाय सभा की स्थापना , अभिव्यक्ति की स्वतंत्र अकालयस्त क्षेत्रों में तगान वसूली न किये जाने की भी मांग की । संयुक्त सचिव कपूरचर जलाया में उत्तरदायी शाय पदा उद्देश्य घोषित किर जयपुर में जमनालाल बा संबंध में प्रस्ताव पारित अक्ति की स्वतंत्रता , लाग - बाग हारे ने की भी मांग की । 1 - 9 मई , 1935 को प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन जयपुर में जब की अध्यक्षता में हुआ , जिसमें प्रजामण्डल के उपर्युक्त उद्देश्यों के संबंध में य में निर्वासित व्यक्तियों का निवासन तुरंत रद करने की मांग की । जमण्डल की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने 30 मई 100 र नियम प्रसारित करके किसी भी गैर पंजीकृत संस्था द्वारा सभा - सम्मेलन व उसका सदस्य बनना अवैध घोषित कर दिया । सरकार ने राज्य कर्मचारियों व उससे अनि के राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया तथा सभा बजलसों पर भी रोक लगा दी । 16 दिसम्बर , 1938 को जमनालाल बजाज के जयपर प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया । 11 फरवरी , 1939 को बजाज ने राज्याज्ञा का उल्लंघन का उपपुर में प्रवेश किया । फलतः उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया । उसी रात्रि को होगतात शाम्बी , चिरंजीलाल , हरिशचन्द्र , कपूरचन्द्र पाटनी और हंस डी . राय को गिरफ्तार कर लिया गया । लेकिन प्रजामण्डल का सत्याग्रह समाप्त होने की जगह गति कर गया हजारों की संख्या में पुरुषों और महिलाओं ने सत्याग्रह में भाग लिया , गिरफ्तार हुए और पुलिस के अत्याचार सहे । 18 मार्च , 1939 को गांधीजी की सता पर सत्याग्रह स्थगित कर दिया गया । अतः राज्य सरकार ने अगस्त , 1939 को सभा सपाहियों को बेलों से मुक्त कर प्रजामण्डल को मान्यता प्रदान कर दी । 25 मई , 1949 को प्रजामण्डल के अधिवेशन में जमनालाल बजाज ने उत्तरदा शासन स्थापित करने की मांग को पुनः दोहराया तथा शेखावाटी के किसान सखावाटी के किसान आंदोलन मण्डल के तीसरे अधिवेशन में दाइसी मध्य प्रजामण्डल कार्यकारिणी से मार साल दल ' का गठन कर लिया । आ . को समर्थन दिया । नवम्बर , 1941 में सीकर में प्रजामण्डल के तीसरे आप उत्तरदायी शासन की मांग पुनः उठाई गई । इसी मध्य प्रजामण्डल कार्यका होने पर विरंजीलाल ने ' प्रजामण्डल प्रगतिशील दल ' का गठन प्रजामण्डल कुछ कमजोर हुआ । अत : सरकार ने प्रजामण्डल की मागा दी । फरवरी , 1942 में श्री बजाज के देहांत से भी प्रजामण्डल का अगस्त , 1942 के ' भारत होने आंदोलन ' के दौरान प्रजामण्डल उत्तरदायी शासन स्थापित करने की मांग की । जयपुर राज्य के प्रधानमंत्री ने हीरालाल शास्त्री को पत्र लिखकर राज्य में शीघ्र ही उत्तरदायी शासन का आश्वासन दिया । अत : प्रजामण्डल ने आंदोलन नहीं छेड़ा । बाम रामकरण जोशी , दौलतमल भण्डारी और हंस दी . - मण्डल की मांगों की उपेक्षा कर प्रजामण्डल को धक्का लगा । रान प्रजामण्डल ने महाराजा के व के प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माईत दायी शासन स्थापित कर छड़ा ।

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