मानसून

मानसून वास्तव में एक अर्ध स्थाई पवन है तो हर कुछ समय पश्चात अपने दिशा के विपरीत दिशा में बनना शुरु कर देती है तथा मानसून वनों से प्रभावित क्षेत्रों में ऋण कटिबंधीय मानसून जलवायु पाई जाती है तथा क्षेत्र अपनी अपनी वार्षिक वर्षा का लगभग 80% भाग ग्रीष्म ऋतु के 2 से 3 महीनों के प्राप्त करने है जिसके दौरान मानसून पवने समुद्र से महाद्वीपों की ओर चलती है इस प्रकार की जलवायु वाले शहरों में उष्णकटिबंधीय पतझड़ वनों का विकास होता है जिन्हें उष्णकटिबंधीय मानसून वन कहते हैं दक्षिण एशिया तथा नॉर्थ ऑस्ट्रेलिया में मानसून जलवायु का प्रभाव सर्वाधिक देखा जाता है भारतीय उपमहाद्वीप पर अप्रैल से अक्टूबर महीने के मध्य मानसून पवने हिंद महासागर से उपमहाद्वीप की ओर चलती है यह हवाएं दक्षिण पश्चिम मानसून हवाएं कहलाती है तथा इन क्षेत्रों में वर्षा लेकर आती है अक्टूबर से अप्रैल महीने के मध्य मानसून पवने उपमहाद्वीप से हिंद महासागर की ओर चलती है यह हवाएं उत्तर पूर्व मानसून हवाएं कहलाती है तथा शुष्क परिस्थितियों का विकास करती है यह हवाएं उत्तर पूर्व मानसून हवाएं कहलाती है तथा शुष्क परिस्थितियों का विकास करती है।
मानसून निर्माण की प्रक्रिया को समझाने के लिए दिए गए सिद्धांत:-यह सिद्धांत मानसून निर्माण के लिए जिम्मेदार मानता है तथा ग्रीष्म ऋतु के दौरान भारतीय महादेव पर उच्च तापमान पाया जाता है जिसके कारण गंगा के मैदानी क्षेत्रों में निम्न दाब परिस्थितियों का विकास होता है इसके विपरीत हिंद महासागर में तापमान कम होने के कारण उच्च दाब परिस्थितियों विकसित होती है तथा इस प्रकार विकसित हुई दाब प्रवणता के कारण हिंद महासागर से महादीप की ओर हवाएं चलने लगती है क्योंकि यह हवाएं महासागरीय क्षेत्रो में आती है इसलिए इनमें जलवाष्प की मात्रा अधिक पाई जाती है तथा यह फिर वर्षा उत्पन्न करती है यही हवाएं दक्षिण पश्चिम मानसून कहलाती है।

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