पुष्कर झील

पुष्कर झील इस झील को सर्वप्रथम पुष्करणा ब्राह्मणों द्वारा खोदे जाने के कारण इसका नाम पुष्कर झील पड़ा। 1809 इसी में मराठा सरदारों ने इस का पुनः निर्माण करवाया तथा यह जेल नेशनल हाईवे 89 पर स्थित है तथा इसके किनारे पर ब्रह्मा जी का मंदिर है जहां मूर्ति आदि शंकराचार्य ने रखी थी तथा इसका वर्तमान स्वरूप गोकुल चंद पारीक ने करवाया सत्ता यह राज्य की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक झील है यह झील ज्वालामुखी से निर्मित है तथा इसे कालाडेरा झील क जाता है भारत की दूसरी कालाडेरा झील लोनार महाराष्ट्र में है तथा इससे हिंदुओं का पांचवा तीर्थ या तीर्थों का मामा तथा सबसे पवित्र पवित्र व सर्वाधिक प्रदूषित झील आदि नामों से जाना जाता है यहीं पर वेदव्यास ने महाभारत की रचना की यही पास में भरतरी की गुफा में कण्व में मुनि का आश्रम है।
यहां पर विश्वामित्र की तपस्या मेनका ने भग की कौरवों पांडवों का मिलन हुआ 1911 मैं मैडम मेरी ने महिला घाट बनाया जो गांधी घाट कहलाता है यहां पर राम जी ने पिता दशरथ का पिंडदान किया सत्ता 1997 98 में कनाडा के सहयोग से सफाई की गई तथा यहां पर कार्तिक पूर्णिमा नवंबर में राज्य का सबसे रंगीन मेला लगता है।
जिसमें सर्वाधिक विदेशी आते हैं तथा यह मेला सर्वाधिक ऊंट बिक्री के लिए प्रसिद्ध है पंचकुंड बुड्ढा पुष्कर में पांडव कुछ समय अज्ञातवास के समय रहे तो चीनी यात्री फाह्यान ए पुष्कर झील पर आगंतुकों की संख्या का संदर्भ दिया है।
आना सागर झील:-यह  झील नागपहाङ व तारागढ़ के मध्य स्थित है। जिसका निर्माण तुर्कों की सेना के सार के बाद खून से रंगी धरती को साफ करने के लिए अरुण राज ने 1137 में चंद्रा नदी के जल को रोककर करवाया।
जहांगीर ने इसके पास में ही शाही बाग या दौलत बाग जिसे वर्तमान में सुभाष उद्यान के नाम से जाना जाता है का निर्माण करवाया तथा शाॅहजहा ने 5 बारहदरी  का निर्माण कराया।

No comments:

Post a Comment