गौ रक्षक देवता

 सर्प दंश से मुक्तिदाता माने जाने वाले राजस्थान के पंच पीर ओं में से एक पीर गोगा जी है तथा इन्हें गौ रक्षक देवता सांपों का देवता हिंदू इन नागराज मुसलमानी ने गोगा पीर महमूद गजनवी ने झार पीर आदि नामों से पुकारा है। इनका जन्म ददरेवा गांव चुरू में भाद्रपद कृष्ण नवमी को चौहान गोत्र की राजपूत जाति में हुआ हुआ तथा इनके पिता का नाम जेवर माता का नाम बात चल पत्नी के मल दे रानी धीमल गुरु गोरखनाथ  पुत्र केसरिया जी गोगा जी की सवारी नीली घोड़ी जिसे गोगा बाप्पा कहते हैं गोगाजी के मुस्लिम पुजारी चायल कहलाते हैं।
इनका स्थान खेजड़ी वृक्ष के नीचे होता है यह महमूद गजनवी से गौ रक्षा के लिए लङते हुए वीरगति को प्राप्त हुए इनका सिर ददरेवा में गिरा अतः वह शीर्ष मेडी या सिद्ध मेडी वे थर्ड गोगामेडी नोहर हनुमानगढ़ में गिरा अतः इसे धुरमेङी कहते हैं तथा गोगामेडी में मंदिर का निर्माण मकबरे नुमा करते में फिरोजशाह तुगलक ने करवाया जिस पर बिस्मिल्लाह अंकित है इसका वर्तमान स्वरूप गोगा सिंह ने दिया गोगामेडी पर भाद्रपद कृष्ण नवमी को मेला लगता है तो दूसरा मेला गोगाजी की ओल्डी की लोरियां की ढाणी सांचौर जालौर में भरता है प्रत्येक किसान खेत की जुताई शुरू करते समय हलवे हलवे के गोगा बागड़ी बनते हैं जिसमें 9 घंटे होती है कहा जाता है कि गोगा जी ने अपने दो भाइयों अर्जुन में सर्जन को मार दिया था चीन की भावना उनकी पत्नी के प्रति बुरी थी गोगा जी की भक्ति में आए वह गाय गीतों को पीर के सोल का जाता है गोगाजी का राज्य आशी स गारा या गडरा तक विस्तृत था‌।
हड़बूजी:-यह पंच पैरों में से एक पीर है इनका जन्म ढूंढ ले नागौर में मेहा जी सांखला के गरबा इनके मौसेरे भाई रामदेव जी की प्रेरणा से बालीनाथ को अपना गुरु बनाया यह एक अच्छे योगी शकुन शास्त्र के ज्ञाता सन्यासी वे योद्धा थे इनका मुख्य पूजा स्थल बैंक फलोदी जोधपुर में है जहां इनके मंदिर में इनकी गाड़ी की पूजा की जाती है जिसमें यह पंगु गायों के लिए चारा लेकर आते थे।

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