शैली

मारवाड़ शैली:-जोधपुर शैली शैली का स्वर्ण काल मालदेव के शासनकाल में था रेत के टीले ऊंट और चिंकारा घोड़े छोटी -छोटी झाङियां आदि का चित्रण इस शैली की विशेषता है।
यह शैली नाथ संप्रदाय से संबंधित है। तथा शिवदास देवदास रामा नाता सज्जू और शैंपू मारवाड़ी शैली के चित्रकार है जोधपुर लघु चित्रकला को हाथ से तैयार किया गया है जो ऊंट की पीठ पर ढोला और मारू जैसे प्रसिद्ध प्रेमियों के दृश्य को दर्शाती है तथा मारवाड़ चित्र शैली में मतिराम द्वारा रचित 19वीं शताब्दी की हिंदी साहित्य रचना रसराज का चित्रण हेतु विषय के रूप में प्रयोग किया गया है तथा मारवाड़ शैली में 1623 ईसवी में निर्मित राग माला चित्रावली का चित्रांकन वीरजी ने किया।
बीकानेर शैली:-इस शैली का स्वर्ण काल अनूप सिंह का शासन काल के लाता है इस शैली के चित्रकार चित्र बनाकर उसके नीचे अपना नाम व तिथि का अंकन करते थे अत्य कलाकार उस्ताद कहलाते थे रामलाल अली रजा नोहा संजय से विख्यात चित्रकारों का चित्रकूट बीकानेर शैली से संबंधित है
जैसलमेर शैली:-इस शैली का स्वर्ण काल मूलराज द्वितीय के शासनकाल में तरवा की राजकुमारी मूमल मरू महोत्सव जैसलमेर में आज भी मिस मूमल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है का चित्र जैसलमेर चित्रकला शैली का प्रमुख विषय है।
किशनगढ़ शैली या कागजी शैली:-इस शैली का स्वर्ण काल सावन सिंह या नागरी दास का शासन काल था सत्ता यह शैली नारी के सौंदर्य पर आधारित है जिसने अपनी प्रेमिका रसिकप्रिया या बणी-ठणी का चित्र मोरध्वज निहालचंद नामक चित्रकार से बनवाया इस शैली को प्रकाश में लाने का श्रेय एरिक डिक्सिन व फैयाज अली को जाता है। एरिक्सन ने इसे भारत की मोनालिसा का है 5 मई 1973 राजस्थानी चित्रकला के चित्र बनी ठनी पर डाक टिकट जारी किया गया अमर चंद द्वारा चित्रित चांदनी रात की संगोष्ठी किशनगढ़ चित्रकला शैली का प्रमुख विषय है तथा इस शैली में मुख्य रूप से केले के वृक्ष को चिन्हित किया गया है तो किशनगढ़ शैली कांगड़ा शैली और ब्रज साहित्य से प्रभावित है तथा रामनाथ तुलसीदास सवाई राम और लाडली दास चित्रकला की किशनगढ़ शैली से संबंधित है।
ढूंढाङ शैली:-इस शैली में जयपुर अलवर जिले आते हैं ।
जयपुर शैली:-इस शैली में मुगल शैली का सर्वाधिक प्रभाव देखा जाता है इसलिए इसमें वात्सायन कृत्य कामसूत्र पत्थरों को भी क्षति नारी कुरान पढ़ती शहजादी लैला मजनू हाथी घोड़ों के दंगल के चित्र में तय हैं इस शैली का स्वर्ण काल सवाई प्रताप सिंह के शासन काल को माना जाता है आदम कद प्रोटेक्ट जयपुर शैली की विशेषता है अतः इस शैली में साहिब राम नामक चित्रकार ने ईश्वर सिंह का राजस्थान में प्रथम आदम कद चित्र बनाया जो वर्तमान में सिटी पैलेस जयपुर में है जयपुर राज्य में कलाकार जहां चित्र और लघु चित्र बनाते थे सूरत करना कहलाता था मोहम्मद शाह का नाम जयपुर से चित्रकला शैली से जुड़ा हुआ है।

No comments:

Post a Comment