राजस्थानी भाषा

राजस्थान की मूल भाषा राजस्थानी है तथा राजस्थानी भाषा की लिपि देवनागरी या महाजनी है। इसकी उत्पत्ति इसकी उत्पत्ति डॉक्टर गियर सन ने नागर अपभ्रंश से मानी है तथा राजस्थान मैं सर्वाधिक मारवाड़ी बोली जाती है सत्ता अबुल फजल ने आईने अकबरी पुस्तक में मारवाड़ी बोली को भारत की मानक बोलियों में गिनाया तथा डॉक्टर टैसीटरी के अनुसार 12 वीं सदी के लगभग राजस्थानी भाषा अपने अस्तित्व में आ चुकी थी तथा राजस्थान की बोलियां पर पहली बार बोलियों का दृटिपात राजस्थान की भाषा के लिए राजस्थानी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग सन 1907-08 में जॉर्ज ने अपनी पुस्तक लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया में किया।
राजस्थानी भाषा का प्राचीनतम ग्रंथ वजृसेन बुरी द्वारा रचित भरते स्वर बाहुबली घोर है तथा उद्बोधन सूरी के आठवीं शताब्दी के कुवलयमाला नामक ग्रंथ में भारत की 18 देशी भाषाओं में मारवाड़ की भाषा को मरू वाणी के नाम से पुकारा तथा राजस्थानी साहित्य का स्वर्ण काल सन 1700-1900 तक माना जाता है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थानी भाषा की सबसे बड़ी बोली मारवाड़ी है जबकि सर्वाधिक लोग ढूंढा ही बोलते हैं राजस्थान में प्रथम भाषा सर्वेक्षण जॉर्ज मेक लिस्ट को कहा जाता है रागङी बोली मारवाड़ी + मालवी बोली का मिश्रण जो दक्षिण पूर्वी राजस्थान में बोली जाती है।
मारवाड़ी बोली :-यह राजस्थानी भाषा का मानक रूप है जिसे राजस्थान की मरू भाषा कहते हैं तथा अधिगम साहित्य इसी भाषा में लिखा हुआ है सर्वाधिक क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा है तथा जिसे पश्चिमी राजस्थान की बोली कहते हैं मारवाड़ी भाषा का विशुद्ध रूप जोधपुर एवं उसके समीपवर्ती क्षेत्रों में दृष्टिगत होता है सोरठा छंद और मांड राग मारवाड़ी बोली की शिल्प गत विशेषताएं हैं। मारवाड़ी बोली बीकानेर नागौर जोधपुर जैसलमेर बाड़मेर आदि जिलों में बोली जाती है पश्चिमी राजस्थान में चारणो द्वारा प्रस्तुत साहित्य की भाषा डिंगल मारवाड़ी बोली का साहित्य रूप है जिस का सर्वप्रथम प्रयोग बेंगल शिरोमणि पुस्तक में कुशल लाभ ने किया पूर्वी राजस्थान में साहित्य भाषा पिंगल भाषा है जिसमें भाटो द्वारा रचित साहित्य आता है।
ढूंढाङी बोली:-यह पूर्वी राजस्थान में सर्वाधिक बोली जाती है तथा संत दादू का साहित्य इसी भाषा में लिखा हुआ है जाट साई बोली राजावाडी बोली आदि बोलियां अलवर जयपुर दोसा आदि जिलों में बोली जाती है।
राजस्थान की मातृभाषा राजस्थानी है तथा राजस्थान की राजभाषा हिंदी है । तथा राजस्थानी भाषा दिवस 21 फरवरी को मनाया जाता है तो 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है ।
मेवाती बोली पश्चिमी हिंदी एवं राजस्थानी के बीच समन्वय का कार्य मेवाती बोली करती है जो भरतपुर अलवर जिलों में बोली जाती है। ब्रज बोली:- यह बोली भरतपुर धौलपुर आदि जिलों में बोली जाती है।

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