तेजाजी का जीवन परिचय

तेजाजी का जीवन परिचय
नाम -तेजाजी
पिता -ताहर जी
माता -रामकुंवरी
वंश -धोलिया वंश
गांव -खरनाल
अस्त्र- भाला
सवारी -घोड़ी
घोड़ी का नाम- लीलन
तेजाजी के पिता खरनाल के मुख्य थे यह कथा तेजाजी का विवाह  बचपन में ही पनेर गांव में रायमल जी की पुत्री पेमल के साथ हो गया था किंतु शादी के कुछ ही समय बाद उनके पिता और पेमल के मामा में कहासुनी हो गई और तलवारें चल गई जिसमें पेमल के मामा की मौत हो गई इस कारण उनके विवाह की बात किसी ने तेजाजी को नहीं बताई एक बार तेजाजी को उनकी भाभी ने तानों के रूप में ही बात उनसे कह दी तब तानों से त्रस्त होकर अपने पत्नी पेमल को लेने के लिए घोड़ी लीलन पर सवार होकर अपनी ससुराल पनेर गए रास्ते में तेजाजी को एक सांप आग में जलता हुआ मिला तो उन्होंने उस सांप को बचा लिया किंतु वह साप जोड़े से बिछड़ जाने के कारण अत्यधिक क्रोध हुआ और उन्हें डसने लगा तो उन्होंने साप लौटते समय  डस लेने का वचन दिया और ससुराल के आगे बढ़े वहां की अज्ञानता के कारण ससुराल पक्ष से उनकी अवज्ञा हो गई नाराज़ तेजाजी वहां से वापस लौटने लगे तो पेमल से उनकी पहली मुलाकात उसकी  सहेली लाचा गुजरी के यहां हुई उसी रात लाचा गुजरी की गाय मेर के मीणा चुरा ले गए लाचा के प्रार्थना पर वचन बंद होकर तेजाजी ने मीणा लुटेरों से संघर्ष कर गाय छुड़ाई इस गोरक्षा युद्ध में तेजाजी अत्यधिक घायल हो गए वापस आने पर वचन की पालना में सांप के बिल पर आए तो तब पूरे शरीर पर घाव होने कारण जीभ पर साप को कटवाया किशनगढ़ के पास सुरसुरा मे सर्प दंश से  उनकी मृत्यु भाद्रपद शुक्ल मिति 1107 तदनुसार 28 अगस्त 1103 को हो गई तथा पेमल ने भी उनके साथ जान दे दी उस सांप ने उनकी वचनबद्ध से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया इसी वरदान कारण तेजाजी भी सांपों के देवता के रूप में पूज्य हुए गांव गांव में तेजाजी के देवरे स्थान में उनकी तलवार धारी अश्वरोई मूर्ति के साथ नाग देवता की मूर्ति भी होती है इन देवरो में सांप के काटने पर जहर जूस कर निकाला जाता है तथा तेजाजी की तांत बांधी जाती है तेजा जी के निर्वाण दिवस भाद्रपद शुक्ल दशमी को तेजा दशमी के रूप में मनाया जाता है तेजाजी धोलिया गोत्र जाट परिवार में हुआ धोलिया शासको की वंशावली इस प्रकार रही-
(1) महारावल
(2)भीमसेन
(3)पीलापंजर (4)सारंगदेव (5)शक्ति पाल (6)रायपाल(7)
धवलपाल(8)नयनपाल (9) घर्षणपाल (10)तकपाल (11)मूलसेन (12)रतनसेन (13)शुंडल(14) कुंडल(15)पिपल(16) उदयराज(17)नरपाल(18) कामराज(19) बोहितराव(20)ताहरदेव (21)तेजाजी
तेजाजी ने 11 वीं सदी में गायों की डाकुओं से रक्षा करने अपने प्राण दाव पर लगा दिए थे वह खरनाल गांव के निवासी थे भादो शुकल दसमी को पूजन होता है तेजाजी का भारत में जाटों में महत्वपूर्ण स्थान है तेजाजी सत्यवादी और दिए हुए वचन पर अटल थे उन्होंने अब अपने हाथों बलिदान तथा सदाचारी जीवन में अमरत्व प्राप्त किया था उन्होंने अपने धार्मिक विचार से जनसाधारण को क्षेत्र मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया और जन सेवा के कारण निष्ठा अर्जित की जात पात की बुराइयों पर रोक लगाई सूत्रों को मंदिर में प्रवेश दिलाया पुरोहितों के आडंबर का विरोध किया तेजाजी के मंदिरों में निम्न वर्गों के लोग पुजारी का काम करते हैं समाज सुधार का इतना पुराना कोई और नहीं है उन्होंने जनसाधारण के हृदय में सनातन धर्म के प्रति लुप्त विश्वास को पुणे जागृत किया इस प्रकार तेजाजी ने अपने अधिकारियों एवं प्रवचनों से जनसाधारण में नव चेतना जागृत कि लोगों की जात पात मैं आस्था कम हो गई कर्म शक्ति भक्ति वैराग्य का एक साद समायोजन दुनिया में सिर्फ वीर तेजाजी के जीवन में ही देखने को मिलता है
तेजाजी राजस्थान मध्यप्रदेश और गुजरात प्रांतों में लोक देवता के रूप में पूजे जाते हैं किसान वर्ग अपनी खेती की खुशहाली के लिए तेजाजी को पूजता है तेजा जी के वंशज मध्य भारत के खिलचीपुर से आकर मारवाड़ में बसे थे नागवंश के धवलराम  के नाम पर धोलिया गोत्र शुरू हुआ तेजाजी के बुजुर्ग उदय राज खरनाल पर कब्जा कर अपनी राजधानी बनाया खरनाल परगने में 24 गांव थे तेजाजी की माता थाकण जाट की बेटी थी
तेजाजी के भारत में अनेक मंदिर है तेजाजी के मंदिर राजस्थान मध्य प्रदेश गुजरात व हरियाणा में प्रसिद्ध है प्रसिद्ध इतिहासकार श्री पी एन ओके का दावा है कि ताजमहल शिव मंदिर है जिस का असली नाम तेजो महालय आगरा मुख्यत जाटों कि नगरी है जाट लोग भगवान शिव को तेजाजी के रूप में  जानते हैं द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया के डाट विशेषांक के अनुसार जाट लोगों के तेजा मंदिर हुआ करते थे अनेक शिवलिंग में एक तेजलिंग भी होता है जिसके जाट लोग उपासक थे इस वर्णन से भी ऐसा प्रतीत होता है कि ताजमहल भगवान तेजाजी का निवास स्थल तेजो महालय था श्री पी एन ओके अपनी पुस्तक ताजमहल इस हिंदू टेंपल प्लेस में 100 से भी अधिक प्रमाण पत्र देकर दावा करते है कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है जिस का असली नाम तेजो महालय है
तेजाजी के जन्म के बारे में मत है-
जाट वीर धौलिया  वंश गांव खरनाल में के माई
आज दिन सुभस भंसे बस्ती फुला छाय
शुभ दिन चौदस वार गुरु, शुक्र माघ पहचान
 सस्त्र 130 के में प्रकटे अवतारी ज्ञान


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