राजस्थान में पशुपालन

राजस्थान में पशुपालन में डेयरी विकास के प्रयास

* भामाशाह पशुधन स्वास्थ्य बीमा योजना:
भारत सरकार तथा राज्य सरकार के आर्थिक सहयोग से इस योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2016- 17 से प्रारंभ किया गया है इस योजना का शुभारंभ 23 जुलाई 2016 को किया गया यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी प्रदेश के समस्त जिलों में पशुओं का बीमा किए जाने को अधिकृत होगी योजना के अंतर्गत उन्हीं पशुपालकों के पशुओं का बीमा किया जाएगा जिनके पास भामाशाह कार्ड है इस योजना के तहत अनुसूचित जाति व जनजाति तथा बीपीएल श्रेणी के पशु पालकों को प्रीमियम राशि का चित्र प्रतिशत तथा अन्य पशुपालकों को 50% अनुदान दिया जाएगा प्रीमियम की शेष राशि व सर्विस टैक्स पशुपालक द्वारा वहन किया जाएगा 1 साल या 3 साल की अवधि के लिए चलाया जाएगा इसमें ए श्रेणी के लिए केंद्रीय सहायता 25 25 प्रतिशत व पशुपालक द्वारा दे राशि 50% होगी बीपीएल एससी एसटी के लिए केंद्रीय सहायता 40% राज्य सहायता 30% तथा पशुपालक द्वारा दे राशि 30% होगी
* राजस्थान का पहला गो अभ्यारण बीकानेर में बनेगा
* उष्ट्र प्रजनन प्रोत्साहन योजना:
2 अक्टूबर 2016 से प्रारंभ इस योजना के तहत ऊंटनी के ब्याने पर उत्पन्न बच्चे की आयु अनुरूप किस्तों में ₹10000 तक की सहायता ऊंट पालक को दी जाती है
* थारपारकर गाय की नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु जोधपुर में  जिले में थारपारकर वंशावली चयन परियोजना प्रारंभ की गई है
* गोवंश संवर्धन के लिए राजस्थान गो संरक्षण एवं संवर्धन निधि निगम 2016 बनाए गए हैं। गायों के पालने के लिए सरकार ने 22 नवंबर 2016 को एक अधिसूचना जारी करके प्रदेश के गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन निधि का गठन किया है गोपालन विभाग निधि के प्रबंधन एवं संचालन का जिम्मा संभालेगा
* केंद्रीय भेड़ अनुसंधान संस्थान:
अविकानगर मालपुरा में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा 1962 में स्थापित
* राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय:
राजस्थान राज्य में 13 मई 2010 को पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना बीकानेर में की गई यह राज्य का एकमात्र वेटरनरी विश्वविद्यालय है
* अपोलो कॉलेज ऑफ़ वेटरनरी मेडिसिन आगरा रोड जयपुर 6 अक्टूबर 2003 को स्थापित
* राज्य का एकमात्र दुग्ध विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी महाविद्यालय उदयपुर में महाराणा प्रताप कृषि तकनीकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित है
* राजस्थान में डेयरी विकास कार्यक्रम सहकारिता के आधार पर गुजरात की आनंद सहकारी दुग्ध संघ के पद्धति पर क्रियान्वित किया जा रहा है
* जयपुर में स्नातकोत्तर पशु चिकित्सा शिक्षा में अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई
* वल्लभनगर में वेटरनरी क्लीनिक कांपलेक्स स्थापित किया गया
* गोपालन विभाग:
वित्तीय वर्ष 2013- 14 की बजट घोषणा के अनुसार प्रत्यक्ष एगो सेवा निदेशालय की स्थापना 22 जुलाई 2013 को की गई मंत्रिमंडल सचिवालय की अधिसूचना दिनांक 13 मार्च 2014 द्वारा गोपालन विभाग का गठन किया गया
* राज्य की पहली एडवांस मिल्क टेस्टिंग वे रिसर्च लैब 7 अक्टूबर 2014 को शुरू की गई हरियाणा में स्थित राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल के बाद यह देश की दूसरी अत्याधुनिक प्रयोगशाला है
* जयपुर जिले में 30 मेट्रिक टन का पाउडर प्लांट गोविंदगढ़ तहसील चोमू में बनाया जा रहा है
* हिम कृत वीर्य बैंक तथा विदेशी पशु प्रजनन फार्म बस्सी के अधीन राज्य का एकमात्र आईएसओ प्रमाणित करता वीर्य बैंक एवं विदेशी पशु प्रजनन केंद्र बस्सी जयपुर में स्थित है
* मुख्यमंत्री मोबाइल वेटरनरी यूनिट- इस योजना के तहत 15 सितंबर 2013 को तहसील स्तरीय चल पशु चिकित्सा इकाई योजना प्रारंभ की गई है
* बछड़ा पालन योजना:
यह योजना रामसर विभाग केंद्र पर गिर नस्ल है तो नोहर व बस्सी केंद्र पर राठी हेतु चांदन एवं बस्सी केंद्र पर थारपारकर हेतु एवं कुम्हेर एवं नागौर वर्कशॉप पालन केंद्र पर मुर्रा भैंस हेतु प्रारंभ की गई है
* बछड़ा पालन पशु पालक के द्वार पर इसके अंतर्गत पशुपालक के द्वार पर ही अधिकतम 30 माह की अवधि तक चिन्हित बछड़ों का पालन पोषण किया जाता है
* पशुधन विकास नीति:
पशु पालक एवं पशुधन के समग्र विकास हेतु वर्ष 2009 10 में प्रथम बार पशुधन विकास नीति तैयार कर लागू की गई़
मेघा बकरी फार्म :
विश्व बैंक की सहायता से राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धा परियोजना के तहत राज्य में मारवाड़ी और सिरोही बकरियों की श्रेष्ठ नस्ल संवर्धन के लिए कोडमदेसर और चित्तौड़गढ़ में 1-1 मेघा बकरी फार्म बनेगा
मुख्यमंत्री पशुधन निशुल्क दवा योजना :
राजस्थान सरकार ने  हेतु 15 अगस्त 2012 से यह योजना लागू की है इस योजना के तहत पशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक दवाइयों का निशुल्क वितरण किया जाएगा
* खेतड़ी झुंझुनू में 25000 लीटर क्षमता का डेयरी संयंत्र स्थापित किया जा रहा है
* राजस्थान पशुधन विकास मिशन:
पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने महिला सशक्तिकरण एवं रोजगार सृजन हेतु वर्ष 2008 -09 में राजस्थान पशुधन विकास मिशन की स्थापना की गई है
* वर्ष 2006-07 में गोवा गोपालक बीमा योजना प्रारंभ
*अविका क्रेडिट कार्ड योजना :
केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से वर्ष 2005 में लागू योजना जिसके अंतर्गत अभी का क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भेड़ पालकों को प्रति पशु डेड सो रुपए की दर से अधिकतम ₹12500 का ऋण प्रदान किया जाता है
* अविका कवच योजना: 
इसमें रोग एवं दुर्घटना से पेड़ की मृत्यु अथवा पूर्ण विकलांगता पर उसकी कीमत का सौ पर्सेंट बीमा लाभ 15 दिवस में दे होता है
* अविका पाल जीवन रक्षक योजना: 
इसमें भेड़ पालक की दुर्घटना विकलांगता अथवा मृत्यु की स्थिति में ₹20000 से ₹50000 तक का बीमा किया जाता है प्रीमियम राशि ₹200  मे से 100 रुपए का भुगतान केंद्र द्वारा ₹25 पशुपालन विभाग द्वारा ₹75 भेड़ पालक द्वारा जमा कराया जाता है
* अवीरक्षक योजना:
 भेड़ पालक की दुर्घटना विकलांगता अथवा दुर्घटना में मृत्यु की स्थिति में ₹15 के प्रीमियम पर 12500 से ₹25000 तक का बीमा लाभ दिया जाता है ₹15 में ₹5 राजस्थान सरकार में ₹10 भेड़ पालक देता है
*पशु चिकित्सालय पशु पालक के द्वार:
वर्ष 2009 -10 से दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मोबाइल इकाइयों के माध्यम से पशु चिकित्सालय पशुपालक के द्वार योजना 1 अगस्त 2009 से प्रारंभ की गई
* वर्ष 2009 में भेड़ बकरी प्रजनन नीति लागू की जा चुकी है
* पशु उत्पाद:
पशुपालन से हमें दुग्ध ऊन मास पर अंडों की प्राप्ति होती है दूध उत्पादन की दृष्टि से हमारे देश का विश्व में प्रथम स्थान है राजस्थान इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश के बाद देश में दूसरे स्थान पर है यहां देश के कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 9 से 10% उत्पादित होता है प्रदेश में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन कर्म से जयपुर श्रीगंगानगर अलवर जिले में होता है एवं बांसवाड़ा जिले में न्यूनतम दुग्ध उत्पादन होता है
* जोधपुर जिला राज्य का सर्वाधिक ऊन उत्पादक जिला है इसके बाद कर्म से बीकानेर में नागौर का स्थान है झालावाड़ जिले में सबसे कम उत्पादित होती है

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