सहकारी विकास के नवीन प्रयास

        हकारिता सामाजिक आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है यह एक सबके लिए सब एक के लिए के मूल सिद्धांत पर आधारित है सहकारिता आंदोलन सदस्यों का सदस्यों द्वारा संचालित कार्यक्रम है
* राजस्थान राज्य में सहकारिता आंदोलन की शुरुआत  1904 मे अजमेर में हुई
* 1953 मैं विभिन्न सहकारी कानूनों में एकरूपता के उद्देश्य से राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम पारित किया गया वर्तमान में 14 नवंबर 2002 को नया सहकारी अधिनियम 2001 लागू किया गया है
* नेफेड द्वारा भरतपुर में राज्य के सहकारी क्षेत्र के पहले जीवाणु खाद के कारखाने की स्थापना की गई
* सहकारी स्वीट भंडार जयपुर में अलवर में इसबगोल का कारखाना आबूरोड में तथा जयपुर में बर्फ का कारखाना सहकारी क्षेत्र में संचालित किए जा रहे हैं
                 सहकारी विकास के नवीन प्रयास
* राजस्थान सहकारी सोसायटी नियम 2003 में संशोधन किए गए
 व्याख्या - इसमें सहकारी संस्थाओं के संचालक मंडल में चुनाव के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है साथ ही अधिकारियों व कर्मचारियों की भर्ती के लिए सहकारी भर्ती बोर्ड के गठन का प्रावधान किया गया है
राज सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना प्रारंभ की गई
व्याख्या -इस योजना के तहत राजस्थान के सहकारी साख क्षेत्र के किसान क्रेडिट कार्ड धारक सदस्यों के लिए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी और सिर्फ बैंक के मध्य समझौता अनुसार ऋणी सदस्य का ₹27 की प्रीमियम राशि पर वह अन्य का ₹54 की प्रीमियम राशि पर ₹500000 का बीमा किया जाता है
सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजना कब लागू की गई
व्याख्या -इस योजना के तहत राजस्थान के सहकारी साख क्षेत्र के किसान क्रेडिट कार्ड धारक सदस्यों के लिए एसबीआई इंश्योरेंस कंपनी एवं शीर्ष बैंक के मध्य समझौता अनुसार ऋणी सदस्य का 6 पॉइंट 50 रुपए प्रति हजार प्रति वर्ष प्रीमियम राशि पर 1000000 रूपए तक का बीमा किया जाता है
राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2016 लागू किया गया
व्याख्या- इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार है
 1. पंचायती राज चुनाव की तर्ज पर सहकारी संस्थाओं के चुनाव में शैक्षणिक योग्यता लागू की गई है इसके द्वारा राजस्थान भारत का पहला प्रदेश बना है जिसकी सहकारी समितियों के चुनाव में शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान किया गया है
2. कार्मिकों की भर्ती के लिए बोर्ड के गठन का प्रावधान राजस्थान देश का पहला राज्य होगा जिसकी सहकारी समितियों कार्मिकों की भर्ती के लिए भर्ती बोर्ड का गठन करेगी जिसके द्वारा मुख्य सहकारी समितियों के कार्मिकों की भर्ती की जाएगी
3. सोसायटी यों को स्वायत्तता प्रदान की गई है पहले सभी सहकारी सोसायटी ओं के निर्वाचन राज्य सहकारी निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा करवाए जाने के प्रावधान थे जिन के स्थान पर अब केवल नियमों में आधारित वर्ग की सहकारी सोसायटी ओं के निर्वाचन ही राज्य सहकारी निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा कराए जाएंगे सेन सोसायटी ओं अपनी आम सभा में निर्वाचन कराने के लिए स्वतंत्र होगी
4. ऑडिट अनिवार्य होगी सहकारी सोसायटी ओं को पूर्व की भांति अपना ऑडिट्स में कराने की स्वायत्तता यथावत रहेगी किंतु यदि किसी सोसायटी द्वारा निर्धारित काल अवधि के भीतर अंकित शक की नियुक्ति नहीं की जाती है तो ऐसी स्थिति में रजिस्ट्रार अपने स्तर पर सोसाइटी के अंकेक्षण हेतु अनेक की नियुक्ति कर सकेगा
5.  अब संचालक मंडल का कोई भी सदस्य लगातार दो कार्यालय से अधिक सदस्य नहीं बन सकेगा लगातार दो कार्यकाल के पश्चात संचालक मंडल की सदस्यता के लिए एक कार्यकाल का अंतराल आवश्यक होगा इससे सहकारी समितियों में गिने-चुने प्रभावशाली लोगों का ही एक आदित्य रहने की पर्वती समाप्त होगी
6. राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्ति संसद का कोई सदस्य या राज्य विधानमंडल का कोई सदस्य या किसी जिला परिषद का प्रमुख या उप प्रमुख या किसी पंचायत समिति का प्रधान या उप प्रधान या किसी ग्राम पंचायत का सरपंच व उपसरपंच या किसी नगर पालिका अथवा स्थानीय निकाय का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष किसी सहकारी सोसायटी का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष नहीं बन सकेगा इससे सहकारी सोसायटी ओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्ति मिल सकेगी
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में पहला सहकारी मिनरल वाटर प्लांट सूरतगढ़ श्री गंगानगर कि 24 पीडी ग्राम सेवा सहकारी समिति ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में पहला सहकार्य मिनरल वाटर प्लांट स्थापित किया है
* राजस्थान में कृषकों को साथ उपलब्ध कराने हेतु व्यवस्था आगरा अनुसार अपनाई गई है
                          सहकारी साख
(अ)  अल्पकालीन व मध्यकालीन साख( त्रिस्तरीय व्यवस्था)
(1) शीर्ष स्तर पर राजस्थान राज्य सहकारी बैंक जयपुर
(2) जिला स्तर पर केंद्रीय सहकारी बैंक (31 बैंक)
(3) प्राथमिक स्तर पर प्राथमिक कृषि सहकारी साख समितियां
(ब)  दीर्घकालीन साख ( द्वि स्तरीय व्यवस्था)
(1) शीर्ष स्तर पर राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक
(2) प्राथमिकी या जिला स्तर पर प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक (कुल 36 बैंक)
   

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