वैश्वीकरण

                      वैश्वीकरण

वैश्वीकरण का सर्वाधिक प्रभाव विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ा है पश्चिम में पूंजीवादी देश एशिया और अफ्रीका में अपने उत्पादों के लिए बाजार ढूंढने में का प्रयत्न कर रहे थे प्रत्येक देश ने अपना बाजार विदेशी वस्तुओं की बिक्री के लिए खोल दिया है अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व व्यापार संगठन दुनिया में आर्थिक नीतियों के निर्धारण में प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं यह संस्थाएं शक्तिशाली पूंजीवादी ताकतों के प्रभाव के क्षेत्र में कार्य कर रही है यद्यपि पिछड़ी अर्थव्यवस्था को भी काफी लाभ हुआ है लोगों के जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है चीन भारत व ब्राजील जेसी प्रगतिशील अर्थव्यवस्थाओं को पिछले अव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक लाभ हुआ है विश्व के विभिन्न देशों में आर्थिक प्रभाव तेज हुआ है पूर्व में विभिन्न देश आयात पर प्रतिबंध अधिक लगा देते परंतु वैश्वीकरण के दौर में प्रतिबंध कमजोर हो गए हैं अब धनी देश के निवेश करता अपना विनिवेश अन्य देशों में कर सकते हैं भारत ब्राज़ील जैसे विकासशील देश विदेशी निवेश के विशेष आकर्षण है
पूंजीवादी देशों कोई से अधिक मुनाफा होता है वैश्वीकरण ने पूरे दुनिया में वैचारिक क्रांति लाने का कार्य किया है अब विचारों के आदान-प्रदान में राष्ट्रीय समूह का असर समाप्त हो गया है इंटरनेट और कंप्यूटर से जुड़ी सेवाओं जैसे बैंक की ऑनलाइन शॉपिंग परिवारिक लेनदेन तो बहुत सरल हो गए हैं लेकिन जितना तेज वस्तु और पूंजी का प्रवाह बड़ा है उतनी तेज लोगों की आवाज आए नहीं बढ़ सकी है विकसित पूंजीवादी देशों ने अपनी वीजा नीति को 9 11 की आतंकवादी घटना के बाद अत्यंत कठोर कर दिया है ऐसा मुख्य रूप से इस कारण से हुआ है कि यह देश आशंकित है की अन्य देश के नागरिक उनके नागरिकों की नौकरी व्यवसाय ने हथिया ले
वैश्वीकरण का अलग-अलग देशों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा है कुछ देशों की अर्थव्यवस्था तेज गति से प्रगति कर रही है वहीं कुछ देश आर्थिक रूप से पिछड़ गए हैं वैश्वीकरण के दौर में सामाजिक न्याय की स्थापना अभी भी संकट में है सरकार का संरक्षण छिन जाने के कारण समाज के कमजोर तबकों को लाभ के बजाय नुकसान उठाना पड़ रहा है कई विद्वान वैश्वीकरण के दौर में पिछड़े लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच तैयार करने की बात कर रहे हैं कुछ लोग वैश्वीकरण को नव उपनिवेशवाद का नाम देकर निंदा कर रहे हैं जबकि वैश्वीकरण के पक्ष कारों का मानना है कि वैश्वीकरण से विकास से संबंधित दोनों बढ़ती है खुले पन के कारण आम आबादी की खुशहाली बढ़ती है हर देश वैश्वीकरण से लाभान्वित होता है
* वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव:
वैश्वीकरण में ने केवल राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र को प्रभावित किया है आप भी तो इसका लोगों के सांस्कृतिक जीवन पर भी काफी प्रभाव पड़ा है इसका विश्व के देश की स्थानीय संस्कृतियों पर मिश्रित प्रभाव पड़ा है इस प्रक्रिया से विश्व की परंपरागत संस्कृतियों को सबसे अधिक खतरा पहुंचने की आशंका है वैश्वीकरण सांस्कृतिक समरूपता को जन्म देता है जिसका विशिष्ट देशज संस्कृतियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है सांस्कृतिक समरूपता के नाम पर पश्चिमी सं संस्कृतिक मूल्यों को अन्य आंचलिक संस्कृतियों पर लादा जा रहा है इससे खानपान रहन सहन वह जीवन शैली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है वैश्वीकरण का सकारात्मक पक्ष यह भी है कि प्रौद्योगिकी के विकास में परिवार से एक नवीन विश्व संस्कृति के उदय की प्रबल संभावनाएं बन गई है इंटरनेट सोशल मीडिया फैक्स उपग्रह तथा केबल टीवी ने विभिन्न राष्ट्रों के मध्य विद्यमान सांस्कृतिक वादों को हटाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है
* भारत पर वैश्वीकरण के प्रभाव:
वैश्वीकरण की लहर का भारत में आगाज पिछली शताब्दी के अंत में हुआ मिश्रित अर्थव्यवस्था में विश्वास करने वाला भारत देश इस धारा से जुड़ गया है भारत में वैश्वीकरण का सूत्रपात 24 जुलाई 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने किया था वह अमेरिकनमुख वैश्वीकरण के लिए कई बार आलोचना की केंद्र रहे व्यवहार में उस समय के वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने ही नई आर्थिक नीतियों को शुरु किया
1991 में नई आर्थिक नीति अपनाकर भारत वैश्वीकरण एवं उदारीकरण की प्रक्रिया से जुड़ गया 1992 से 93 से रुपए को पूर्ण परिवर्तनीय मनाया गया पूंजी बाजार और वित्तीय सुधारों के लिए कदम उठाए गए आयात निर्यात नीति को सुधारा गया इसमें प्रतिबंधों को हटाया गया 30 दिसंबर 1994 को भारत में एक अंतरराष्ट्रीय समझौता वादी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए 1 जनवरी 1995 को विश्व व्यापार संगठन की स्थापना हुई और भारत इस पर हस्ताक्षर करके इसका सदस्य बन गया समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत ने अनेक नियमों और औपचारिकताओं को समाप्त करना शुरू कर दिया जो वर्षों से आर्थिक विकास में बाधक बनी हुई थी प्रशासनिक व्यवस्था में अनेक सुधार किए गए और सरकारी तंत्र की जटिलताओं को हल्का किया गया
देश में अभी भी वैश्विक परिवर्तन का दौर जारी है भारतीय राजनीति पर वैश्वीकरण के भिन्न-भिन्न प्रभाव पड़े हैं इन चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय संघवाद की तीन अलग-अलग प्रक्रिया सामने आई है पहला ही है आशंका है कि वैश्वीकरण के कारण अर्थव्यवस्था की डील से देश के आर्थिक विकास पर विषम प्रभाव पड़ा है क्योंकि भारत अभी भी एक विकासशील देश है और यह विकास के मार्ग पर वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रवृत्तियों का लाभ लेते हुए विकसित देशों की बराबरी नहीं कर सकता वैश्वीकरण का सर्वाधिक लाभ अर्थव्यवस्थाओं को होगा जो पहले से ही विकसित है अर्ध विकसित और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए देश इस दौड़ में पीछे रह जाएंगे यदि भारतीय राज्य को संतुलित समग्र समाजवादी विकास की अभिवृद्धि करनी है तो राष्ट्रीय सरकार की शक्तियों में भी बढ़ोतरी करनी पड़ेगी इसी कारण प्रतिस्पर्धा और बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए वह सम्मान नीतियों को लागू करने के लिए केंद्रीकरण की मांग करती है
दूसरा वैश्वीकरण की परवर्ती वैधता का संकट पैदा करती है एक तरफ राष्ट्रीय राज्य अपनी आर्थिक संप्रभुता को तो कम कर देता है किंतु आंतरिक संप्रभुता का परित्याग करने सेपरेट रखता है घरेलू संप्रभुता को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय राज्य को स्थानीय लोकतांत्रिक संरचनाओं की रचना करनी पड़ती है ताकि राज्य की वैधता आगे बढ़ सके
भारतीय संघवाद की तीसरी परत पंचायती राज की संवैधानिक मान्यता है इसे चिंता का प्रतिबिंब है इस पर वर्दी का नवीन स्थानीयता की संज्ञा दी जाती है


राजस्थान में पशुपालन

राजस्थान में पशुपालन में डेयरी विकास के प्रयास

* भामाशाह पशुधन स्वास्थ्य बीमा योजना:
भारत सरकार तथा राज्य सरकार के आर्थिक सहयोग से इस योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2016- 17 से प्रारंभ किया गया है इस योजना का शुभारंभ 23 जुलाई 2016 को किया गया यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी प्रदेश के समस्त जिलों में पशुओं का बीमा किए जाने को अधिकृत होगी योजना के अंतर्गत उन्हीं पशुपालकों के पशुओं का बीमा किया जाएगा जिनके पास भामाशाह कार्ड है इस योजना के तहत अनुसूचित जाति व जनजाति तथा बीपीएल श्रेणी के पशु पालकों को प्रीमियम राशि का चित्र प्रतिशत तथा अन्य पशुपालकों को 50% अनुदान दिया जाएगा प्रीमियम की शेष राशि व सर्विस टैक्स पशुपालक द्वारा वहन किया जाएगा 1 साल या 3 साल की अवधि के लिए चलाया जाएगा इसमें ए श्रेणी के लिए केंद्रीय सहायता 25 25 प्रतिशत व पशुपालक द्वारा दे राशि 50% होगी बीपीएल एससी एसटी के लिए केंद्रीय सहायता 40% राज्य सहायता 30% तथा पशुपालक द्वारा दे राशि 30% होगी
* राजस्थान का पहला गो अभ्यारण बीकानेर में बनेगा
* उष्ट्र प्रजनन प्रोत्साहन योजना:
2 अक्टूबर 2016 से प्रारंभ इस योजना के तहत ऊंटनी के ब्याने पर उत्पन्न बच्चे की आयु अनुरूप किस्तों में ₹10000 तक की सहायता ऊंट पालक को दी जाती है
* थारपारकर गाय की नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु जोधपुर में  जिले में थारपारकर वंशावली चयन परियोजना प्रारंभ की गई है
* गोवंश संवर्धन के लिए राजस्थान गो संरक्षण एवं संवर्धन निधि निगम 2016 बनाए गए हैं। गायों के पालने के लिए सरकार ने 22 नवंबर 2016 को एक अधिसूचना जारी करके प्रदेश के गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन निधि का गठन किया है गोपालन विभाग निधि के प्रबंधन एवं संचालन का जिम्मा संभालेगा
* केंद्रीय भेड़ अनुसंधान संस्थान:
अविकानगर मालपुरा में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा 1962 में स्थापित
* राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय:
राजस्थान राज्य में 13 मई 2010 को पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना बीकानेर में की गई यह राज्य का एकमात्र वेटरनरी विश्वविद्यालय है
* अपोलो कॉलेज ऑफ़ वेटरनरी मेडिसिन आगरा रोड जयपुर 6 अक्टूबर 2003 को स्थापित
* राज्य का एकमात्र दुग्ध विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी महाविद्यालय उदयपुर में महाराणा प्रताप कृषि तकनीकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित है
* राजस्थान में डेयरी विकास कार्यक्रम सहकारिता के आधार पर गुजरात की आनंद सहकारी दुग्ध संघ के पद्धति पर क्रियान्वित किया जा रहा है
* जयपुर में स्नातकोत्तर पशु चिकित्सा शिक्षा में अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई
* वल्लभनगर में वेटरनरी क्लीनिक कांपलेक्स स्थापित किया गया
* गोपालन विभाग:
वित्तीय वर्ष 2013- 14 की बजट घोषणा के अनुसार प्रत्यक्ष एगो सेवा निदेशालय की स्थापना 22 जुलाई 2013 को की गई मंत्रिमंडल सचिवालय की अधिसूचना दिनांक 13 मार्च 2014 द्वारा गोपालन विभाग का गठन किया गया
* राज्य की पहली एडवांस मिल्क टेस्टिंग वे रिसर्च लैब 7 अक्टूबर 2014 को शुरू की गई हरियाणा में स्थित राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल के बाद यह देश की दूसरी अत्याधुनिक प्रयोगशाला है
* जयपुर जिले में 30 मेट्रिक टन का पाउडर प्लांट गोविंदगढ़ तहसील चोमू में बनाया जा रहा है
* हिम कृत वीर्य बैंक तथा विदेशी पशु प्रजनन फार्म बस्सी के अधीन राज्य का एकमात्र आईएसओ प्रमाणित करता वीर्य बैंक एवं विदेशी पशु प्रजनन केंद्र बस्सी जयपुर में स्थित है
* मुख्यमंत्री मोबाइल वेटरनरी यूनिट- इस योजना के तहत 15 सितंबर 2013 को तहसील स्तरीय चल पशु चिकित्सा इकाई योजना प्रारंभ की गई है
* बछड़ा पालन योजना:
यह योजना रामसर विभाग केंद्र पर गिर नस्ल है तो नोहर व बस्सी केंद्र पर राठी हेतु चांदन एवं बस्सी केंद्र पर थारपारकर हेतु एवं कुम्हेर एवं नागौर वर्कशॉप पालन केंद्र पर मुर्रा भैंस हेतु प्रारंभ की गई है
* बछड़ा पालन पशु पालक के द्वार पर इसके अंतर्गत पशुपालक के द्वार पर ही अधिकतम 30 माह की अवधि तक चिन्हित बछड़ों का पालन पोषण किया जाता है
* पशुधन विकास नीति:
पशु पालक एवं पशुधन के समग्र विकास हेतु वर्ष 2009 10 में प्रथम बार पशुधन विकास नीति तैयार कर लागू की गई़
मेघा बकरी फार्म :
विश्व बैंक की सहायता से राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धा परियोजना के तहत राज्य में मारवाड़ी और सिरोही बकरियों की श्रेष्ठ नस्ल संवर्धन के लिए कोडमदेसर और चित्तौड़गढ़ में 1-1 मेघा बकरी फार्म बनेगा
मुख्यमंत्री पशुधन निशुल्क दवा योजना :
राजस्थान सरकार ने  हेतु 15 अगस्त 2012 से यह योजना लागू की है इस योजना के तहत पशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक दवाइयों का निशुल्क वितरण किया जाएगा
* खेतड़ी झुंझुनू में 25000 लीटर क्षमता का डेयरी संयंत्र स्थापित किया जा रहा है
* राजस्थान पशुधन विकास मिशन:
पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने महिला सशक्तिकरण एवं रोजगार सृजन हेतु वर्ष 2008 -09 में राजस्थान पशुधन विकास मिशन की स्थापना की गई है
* वर्ष 2006-07 में गोवा गोपालक बीमा योजना प्रारंभ
*अविका क्रेडिट कार्ड योजना :
केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से वर्ष 2005 में लागू योजना जिसके अंतर्गत अभी का क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भेड़ पालकों को प्रति पशु डेड सो रुपए की दर से अधिकतम ₹12500 का ऋण प्रदान किया जाता है
* अविका कवच योजना: 
इसमें रोग एवं दुर्घटना से पेड़ की मृत्यु अथवा पूर्ण विकलांगता पर उसकी कीमत का सौ पर्सेंट बीमा लाभ 15 दिवस में दे होता है
* अविका पाल जीवन रक्षक योजना: 
इसमें भेड़ पालक की दुर्घटना विकलांगता अथवा मृत्यु की स्थिति में ₹20000 से ₹50000 तक का बीमा किया जाता है प्रीमियम राशि ₹200  मे से 100 रुपए का भुगतान केंद्र द्वारा ₹25 पशुपालन विभाग द्वारा ₹75 भेड़ पालक द्वारा जमा कराया जाता है
* अवीरक्षक योजना:
 भेड़ पालक की दुर्घटना विकलांगता अथवा दुर्घटना में मृत्यु की स्थिति में ₹15 के प्रीमियम पर 12500 से ₹25000 तक का बीमा लाभ दिया जाता है ₹15 में ₹5 राजस्थान सरकार में ₹10 भेड़ पालक देता है
*पशु चिकित्सालय पशु पालक के द्वार:
वर्ष 2009 -10 से दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मोबाइल इकाइयों के माध्यम से पशु चिकित्सालय पशुपालक के द्वार योजना 1 अगस्त 2009 से प्रारंभ की गई
* वर्ष 2009 में भेड़ बकरी प्रजनन नीति लागू की जा चुकी है
* पशु उत्पाद:
पशुपालन से हमें दुग्ध ऊन मास पर अंडों की प्राप्ति होती है दूध उत्पादन की दृष्टि से हमारे देश का विश्व में प्रथम स्थान है राजस्थान इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश के बाद देश में दूसरे स्थान पर है यहां देश के कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 9 से 10% उत्पादित होता है प्रदेश में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन कर्म से जयपुर श्रीगंगानगर अलवर जिले में होता है एवं बांसवाड़ा जिले में न्यूनतम दुग्ध उत्पादन होता है
* जोधपुर जिला राज्य का सर्वाधिक ऊन उत्पादक जिला है इसके बाद कर्म से बीकानेर में नागौर का स्थान है झालावाड़ जिले में सबसे कम उत्पादित होती है

राजस्थान में शिक्षा के विकास की योजनाएं

राजस्थान में शिक्षा के विकास की योजनाएं एवं कार्यक्रम

* उत्कृष्ट विद्यालय योजना: 
राज्य के प्रारंभिक शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2016 17 से प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक पाठ में किया उच्च प्राथमिक विद्यालय का चयन कर उसे उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में विकसित करने हेतु यह योजना प्रारंभ की गई है यह उत्कृष्ट विद्यालय ग्राम पंचायत के अन्य विद्यालय हेतु मार्गदर्शी विद्यालय एवं संदर्भ केंद्र का कार्य करेंगे तथा इन्हें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा
* आंगनबाड़ी पाठशाला:
30 मार्च 2017 प्रदेश के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों का नाम आंगनवाड़ी पाठशाला रखा गया है इनमें फ्री स्कूल वर्क बुक्स के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा कार्यक्रम लागू किया गया है
* राष्ट्रीय आविष्कार अभियान:
यह भारत सरकार द्वारा प्रारंभिक शिक्षा स्तर पर सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत वर्ष 2016 से 17 से प्रारंभ किया गया कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य बच्चों को प्रौद्योगिकी अवलोकन द्वारा सीखने के अवसर उपलब्ध कराना यह उन्हें वैज्ञानिक अन्वेषण के अवसर सुलभ कराना है
* शगुन पोर्टल:
 केंद्र सरकार द्वारा राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों में सर्व शिक्षा अभियान की विभिन्न योजनाओं किया कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की प्रगति को मॉनिटर करने हेतु विकसित किया गया ऑनलाइन पोर्टल है
* शाला सिद्धि कार्यक्रम:
मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं न्यूपा के दिशा निर्देशों अनुसार शाला सिद्धि कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूल मानक एवं मूल्यांकन के तहत प्रत्येक विद्यालय की अपने स्तर पर स्वयं मूल्यांकन करने की कार्य योजना बनाई गई है
* स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय:
इस कार्यक्रम के तहत सर्व शिक्षा अभियान राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान एवं सार्वजनिक उपक्रम  के माध्यम से राज्य के सभी राजकीय विद्यालयों में शौचालय निर्माण करवाया गया है
* आदर्श विद्यालय योजना:
इस योजना की घोषणा बजट 2015 से 16 में की गई है माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता हेतु आधारभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में चरणबद्ध रूप से एक विद्यालय को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है यह विद्यालय अन्य विद्यालयों के लिए मेंटर एवं संदर्भ केंद्र के रूप में कार्य करेंगे योजना का जिला स्तर पर क्रियान्वयन जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद की जिला निष्पादन समिति द्वारा किया जा रहा है इन आदर्श विद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है
* मुख्यमंत्री हमारी बेटियां योजना:
मुख्यमंत्री हमारी बेटियां योजना सत्र 2015 से 16 से प्रारंभ की गई है योजना अंतर्गत राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सेकेंडरी परीक्षा में प्रत्येक जिले में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली दो मेधावी छात्रों को कक्षा 11 व 12 में पुस्तकें स्टेशनरी यूनिफॉर्म इत्यादि के लिए ₹15000 वार्षिक तथा स्नातक और स्नातकोत्तर में अध्ययन हेतु ₹25000 वार्षिक एकमुश्त सहायता दी जाएगी इसके अलावा कक्षा 11 व 12 में अध्ययन हेतु आवश्यक समस्त स्वरूप छात्रावास कोचिंग शुल्क हेतु अधिकतम रुपए एक लाख तक तथा कक्षा 12 के पश्चात स्कोर तक अध्ययन हेतु अधिकतम ₹200000 तक प्रतिवर्ष सहायता दी जाएगी 1 जून 2016 से इस योजना का दायरा बढ़ाया गया है अब दसवीं कक्षा की हर जिले की बीपीएल परिवार की टॉपर बेटी को भी इस योजना का लाभ मिलेगा
* सड़क सुरक्षा पाठ्यक्रम:
वर्ष 2015- 16 से सड़क सुरक्षा के प्रति बच्चों को जागरूक एवं संवेदनशील बनाने के लिए राज्य के विद्यालयों की कक्षा 6 से 10 तक के पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा शिक्षा को सम्मानित किया गया है
* शाला दर्पण कार्यक्रम:
 शाला दर्पण गवर्नेंस से संबंधित एक सूचना तंत्र है जो राज्य के प्राथमिक शिक्षा के समस्त राजकीय विद्यालय विद्यार्थी एवं शिक्षकों से संबंधित जानकारी को कंप्यूटर में इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन प्रदर्शित करता है राजकीय उच्च माध्यमिक या माध्यमिक विद्यालयों में एवं स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूलों के प्रबंधन के सुदृढ़ीकरण हेतु शाला दर्पण पोर्टल प्रारंभ किया गया है
* पढ़ो परदेश योजना:
अल्पसंख्यक मंत्रालय की योजना जिसमें छात्रों को पढ़ाई के लिए मिलने वाले ₹2000000 तक का ब्याज केंद्र सरकार चुका आएगी योजना का लाभ स्नातकोत्तर पी एच डी रिसर्च व इसके समकक्ष पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए यह ले सकते हैं इसके लिए आवश्यक है कि-
अभिभावक की सालाना आय ₹600000 से अधिक ने हो
छात्र ने विदेश के शिक्षण संस्थान में दाखिला ले लिया हो
* बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ:
अभियान एवं पीसीपीएनडीटी एक्ट के क्रियान्वयन के जरिए राजस्थान राज्य समूचे देश मैं आदर्श के रूप में उभर कर सामने आया है
* बालिका शिक्षा प्रोत्साहन पुरस्कार:
यह योजना सत्र 2008 -09 में प्रारंभ की गई योजना अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित सीनियर सेकेंडरी कला विज्ञान वाणिज्य एवं वरिष्ठ उपाध्याय परीक्षा में राजकीय अनुदानित विद्यालयों में अध्ययनरत 75% या अधिक अंक प्राप्त करने वाली पात्र बालिकाओं को ₹5000 की राशि एवं प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया जाता है
* गार्गी पुरस्कार:
वर्ष 1998 से प्रारंभ इस योजना में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर द्वारा आयोजित सेकेंडरी एवं प्रवेशिका परीक्षा में 75% या अधिक अंक प्राप्त करने वाली बालिकाओं को कक्षा 11 व 12 में नियमित अध्ययन रत रहने पर प्रतिवर्ष ₹3000 एवं प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया जाता है पुरस्कार हेतु प्रत्येक जिला मुख्यालय पर प्रतिवर्ष बसंत पंचमी को समारोह आयोजित किया जाता है सत्र 2015 -16 में यह समारोह पहली बार पंचायत समिति स्तर पर आयोजित किया गया पुरस्कार हेतु राशि निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर द्वारा उपलब्ध कराए जाती है
* मिड डे मील योजना अंतर्गत उत्सव भोज के नाम से जनसहयोग वाली योजना को 2 सितंबर 2015 से लागू किया गया
* नागौर जिले में जिला कलेक्टर राजन विशाल द्वारा 22 जुलाई 2016 को बालिकाओं को उच्च शिक्षा प्रदान करने की लाडो रानी योजना प्रारंभ हुई
* राजस्थान का पहला पेट्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बाड़मेर में खुलेगा
* देश का पहला आयुष विश्वविद्यालय जोधपुर में स्थापित होगा
* कन्या लोहडी  गंगानगर जिले में गरीब बच्चियों की उच्च शिक्षा की अनोखी पहल है
* मीना मंच:
9206 नोडल विद्यालयों एवं 200 केजीबीवी मैं कक्षा 6 से 8 तक अध्ययनरत बालिकाओं में सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूकता पैदा करने की दृष्टि से मीना मंच का गठन किया गया
* शारदे बालिका छात्रावास योजना:
शिक्षा की  दृष्टि से पिछड़े हुए 186 ब्लॉक्स में गुणवत्तापूर्ण माध्यमिक स्तर की शिक्षा की पहुंच बालिकाओं तक बनाने के लिए माध्यमिक कक्षाओं में अध्ययनरत बालिकाओं के आवास हेतु शारदे बालिका छात्रावास ओं की स्थापना की जा रही है इनमें छात्रों की क्षमता प्रति छात्रावास 100 का मानक निर्धारित है
* मुख्यमंत्री जन सहभागिता विद्यालय विकास योजना:
मुख्यमंत्री द्वारा इस योजना की घोषणा बजट 2016- 17 में की गई माध्यमिक शिक्षा के विद्यालयों में जन आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के विकास हेतु जन सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2016- 17 से मुख्यमंत्री जन सहभागिता विद्यालय विकास योजना प्रारंभ की गई है
* साइकिल वितरण योजना:
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दृष्टि से यह योजना 2007 -08 से संचालित है इसके तहत आठवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात राजकीय विद्यालय में 9 वीं कक्षा में प्रवेश लेने पर राज्य की प्रत्येक बालिकाओं को निशुल्क साइकिल वितरित की जाती है छात्राओं को साइकिल योजना के स्थान पर ट्रांसपोर्ट वाउचर का लाभ लेने का भी विकल्प है छात्राओं को साइकिल वितरण योजना में ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना में से किसी एक योजना का ही लाभ दे होगा
* विद्यार्थी दुर्घटना बीमा योजना:
यह योजना वर्ष 2006-07 से लागू है राज्य सरकार के बीमा एवं प्रावधाई निधि विभाग द्वारा इस योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है अब इसकी बीमा राशि बढ़ाकर ₹300000 कर दी है योजना अंतर्गत कक्षा 9 से 12 के छात्र छात्राओं के लिए सामूहिक सुरक्षा दुर्घटना बीमा क्रम से 10 एवं ₹5 प्रीमियम के रूप में एकत्रित राशि तथा शेष राशि विभाग द्वारा राज्य बीमा विभाग को जमा करवाई जाती है बीमा राशि ₹100000 हैं
* राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान योजना:
भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय में राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान योजना बनाई है इस योजना का उद्देश्य राज्यों के उच्च शिक्षण संस्थाओं में एक्सिस इक्विटी तथा क्वालिटी मैं गुणात्मक अभिवृत्ति करना है इस योजना हेतु राजस्थान राज्य उच्च शिक्षा परिषद का कार्यात्मक आदेश दिनांक 8 जुलाई 2015 के तहत दिनांक 11 जनवरी 2016 को बंद हो गया है
* साक्षर भारत मिशन:
प्रोड शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु केंद्र व राज्य को 60:40 की भागीदारी से 8 सितंबर 2009 को केंद्र द्वारा प्रारंभ योजना राज्य में इसकी शुरुआत 14 दिसंबर 2009 से की गई यह कार्यक्रम केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ही संचालित किया जा रहा है
* आपकी बेटी योजना:
बालिका शिक्षा फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2004 -05से प्रारंभ योजना जिसमें निर्धन प्रतिभावन बालिकाओं को जिनके माता-पिता में से दोनों या किसी एक का निधन हो गया हो उसको कक्षा एक से आठवीं तक 1100 /-9वीं से 12वीं कक्षा में अध्ययनरत बालिकाओं को प्रति वर्ष 1500रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी

राज्यपाल का पद

     राज्यपाल का पद
*स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात देसी रियासतों के एकीकरण के बाद राजस्थान में राज्य प्रमुख का पद सृजित किया गया था राज राज्य के पहले वे एकमात्र राज्य प्रमुख 30 मार्च 1949 को जयपुर के भूतपूर्व महाराजा सवाई मानसिंह बनाए गए जिन्होंने 1 नवंबर 1956 तक कार्य किया राजस्थान में 1 नवंबर 1956 को राज्य के पुनर्गठन के बाद राजप्रमुख के स्थान पर राज्यपाल का पद सृजित हुआ राज्य के प्रथम राज्यपाल सरदार गुरुमुख निहाल सिंह बने
*राज्य का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होता है राज्य की समस्त कार्यपालिका में विदाई शक्तियां राज्यपाल में निहित होती है वह राज्य का प्रथम नागरिक होता है संविधान के अनुच्छेद 153 के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल की व्यवस्था की गई है
नियुक्ति एवं कार्यकाल :संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति केंद्रीय मंत्री परिषद की अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है अनुच्छेद 156 के अनुसार राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत अपने पद पर बना रहता है राष्ट्रपति कभी भी राज्यपाल को पद मुक्त कर सकता है उसे समय से पूर्व वापस बुला सकता है सामान्यतया राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष का है
राज्यपाल की योग्यताएं: वह भारत का नागरिक होना चाहिए कम से कम 35 वर्ष की आयु  का होना चाहिए राम वह केंद्र या राज्य विधायिका का सदस्य ने हो यदि वह सदस्य है तो राज्यपाल का पद ग्रहण करते हैं उसका पद रिक्त माना जाएगा राम वह सरकार के किसी लाभ के पद पर नियुक्त में हो
शपथ :राज्यपाल को संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश अथवा उसकी अनुपस्थिति की दशा में वरिष्ठ न्यायाधीश पद की शपथ दिलाता है
त्यागपत्र :राज्यपाल राष्ट्रपति को संबोधित अपना लिखित में हस्ताक्षरित त्याग पत्र प्रेषित कर कभी भी पद मुक्त हो सकता है
राज्यपाल की शक्तियां :अनुच्छेद 163 राज्यपाल की शक्तियां को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है
(1)वह शक्तियां जिनका प्रयोग वह मुख्यमंत्री की सलाह से करता है
(2) वे शक्तियां जिनका प्रयोग वह श्री विवेक के आधार पर करता है
(1)राज्यपाल की कार्यपालिका शक्तियां: संविधान के अनुच्छेद 154 के अनुसार राज्य के समस्त कार्य कारी शक्तियां राज्यपाल में निहित होती है वह राज्य सरकार की कार्यपालिका का प्रधान होता है राज्य सरकार का सारा कार्य राज्यपाल के नाम पर चलाया जाता है राज्यपाल की कार्यकारी शक्तियां उन सभी विषयों पर लागू होती है जिन पर राज्य के विधानमंडल को विधि निर्माण का अधिकार प्राप्त है राज्यपाल की कार्यकारी शक्तियां प्रमुख रूप से निम्न है-
*राज्यपाल मुख्यमंत्री व उसकी सलाह से मंत्रिपरिषद के सदस्यों की नियुक्ति करता है तथा उनके मध्य कार्य का विभाजन करता है राज्यपाल सामान्य थे बहुमत दल के नेता को ही मुख्यमंत्री नियुक्त करता है किसी भी दल को विधानसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त न होने पर राज्यपाल श्री विवेक से उस दल के नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए आमंत्रित करता है जो विधानसभा में बहुमत सदस्यों का विश्वास प्राप्त कर लेगा
*राज्यपाल राज्य के महाधिवक्ता एवं लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत अपने पद पर बना रहता है
*राज्यपाल राज्य के सभी विश्वविद्यालयों का पदेन कुलाधिपति होता है तथा विश्वविद्यालयों के कुलपति की नियुक्ति करता है
*राज्यपाल मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद को पद व उसकी गोपनीयता की शपथ दिलाता है आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पदच्युत करता है एवं उन के त्याग पत्र स्वीकार करता है
            राज्यपाल की अन्य कार्यकारी शक्तियां
*राज्यपाल राज्य मामलों के प्रशासन वह विधायक के प्रस्ताव से संबंधित कोई भी सूचना मुख्यमंत्री से मांग सकता है
*वह राज्य के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की नियुक्ति करता है
* विधानसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय के सदस्यों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो राज्यपाल और समुदाय के एक सदस्य को मनोनीत करता है
*यदि राज्य में विधान परिषद भी विद्यमान है तो राज्यपाल को विधान परिषद के कुल सदस्यों के 1/ 6 भाग हेतु ऐसे व्यक्तियों को मनोनीत करने का अधिकार है जिन्हें साहित्य विज्ञान काला सहकारी आंदोलन और समाज सेवा आदि विषयों के संबंध में व्यवहारिक ज्ञान विशेष अनुभव हो
 *राज्य की सिविल सेवाओं के सदस्य राज्यपाल के नाम पर नियुक्त किए जाते हैं और वे राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत पद धारण करते हैं
*राज्यपाल राज्य के लोकायुक्त की नियुक्ति करता है
*राज्यपाल राज्य में संवैधानिक संकट उपस्थित होने अथवा राजनीतिक स्थिरता या अन्य किसी कारण से संवैधानिक तंत्र की असफलता की स्थिति उत्पन्न होने पर राज्य की स्थिति के संबंध में राष्ट्रपति को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है उसके प्रतिवेदन के आधार पर अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है इस स्थिति में राज्यपाल सरकार के अभिकर्ता के रूप में कार्य करता है इसे राज्यपाल की आपातकालीन शक्ति भी कहा जा सकता है
               (2) राज्यपाल की विधायी शक्तियां
*राज्यपाल व्यवस्थापिका का प्रमुख होता है
*उसे राज्य विधान सभा का अधिवेशन बुलाने उसका सत्रावसान करने तथा किसी भी समय विधानसभा को भंग करने का अधिकार प्राप्त है
*साधारणतया आम चुनाव के बाद नहीं विधानसभा बनाने पर वह उद्घाटन भाषण देता है राज्यपाल हर वर्ष सदन के पहले सत्र को संबोधित करता है अतः अभी भाषण देता है
*विधान मंडल द्वारा पारित कोई विधेयक तब कानून का रूप धारण नहीं करता जब तक राज्यपाल उस पर अपनी स्वीकृति नहीं देता वह चाहे तो विधेयक पर हस्ताक्षर सकता है या सदन के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है या विधेयक को राष्ट्रपति के पास विचारात्मक चित कर सकता है वैसे विधायक को यदि विधानसभा द्वारा संशोधन साहित्य संशोधन रहित दोबारा राज्यपाल के पास भेजा जाता है तो राज्यपाल को हस्ताक्षर करना आवश्यक होता है
*वित्त विधेयक को राज्यपाल पुनर्विचार के लिए नहीं भेज सकता
*राज्यपाल को राष्ट्रपति के सम्मान ही अध्यादेश जारी कर कानून निर्माण का अधिकार है राष्ट्रपति या राज्य के मुख्यमंत्री की सलाह पर विधानमंडल के सत्र में होने पर किसी आपातकालीन निर्णय की आवश्यकता पूर्ण करने हेतु अनुच्छेद 213 एक के तहत राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है यह अध्यादेश विधानमंडल द्वारा पारित कानून की भांति प्रभावी होता है यह अध्यादेश विधानसभा सत्ता में आने के 6 सप्ताह तक जारी रहते हैं इन 6 सप्ताह के अंदर भी यदि विधानमंडल उन्हें स्वीकृत नहीं करता है तो स्वयं समाप्त हो जाते हैं राज्यपाल इन आदेशों को पहले भी वापस ले सकता है
(3) राज्यपाल की वित्तीय शक्तियां
*राज्यपाल वित्तीय वर्ष प्रारंभ होने से पूर्व वार्षिक वित्तीय विवरण एवं बजट विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करवाता है
*वित्तीय विधेयक राज्यपाल की पूर्व अनुमति के बाद ही राज्य विधान मंडल में प्रस्तुत किए जाते हैं
 *पंचायतों में नगर पालिका की वित्तीय स्थितियों की समीक्षा के लिए वे प्रत्येक 5 वर्ष पर 1 वित्त आयोग का गठन करता है
(4) राज्यपाल की न्यायिक शक्तियां:
राज्यपाल राज्य सूची में दिए गए विषयों के संबंध में न्यायालय द्वारा दंडित किए गए व्यक्तियों को समा कर सकता है तथा दंड को निलंबित या स्थगित कर सकता है परंतु मृत्युदंड के संबंध में यह शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है
(5) राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियां:
संविधान के अनुच्छेद 163 के अनुसार राज्यपाल को कतिपय विवेकाधीन शक्तियां दी गई है इस बात का निर्धारण करना स्वयं राज्यपाल का क्षेत्राधिकार है कि कौन सा कार्य उसके विवेका अधिकार के अंतर्गत आता है राज्यपाल के इस निर्णय को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग राज्यपाल अपने विवेक या व्यक्तिगत निर्णय से करता है उसे इस संबंध में मंत्रिपरिषद पर परामर्श लेने की आवश्यकता नहीं है
राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियां निम्न है-
संविधान द्वारा प्रदत शक्तियां: 
राज्य विधान मंडल द्वारा प्रस्तुत किसी विधेयक को अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राष्ट्रपति के विचार आज आरक्षित रखने की शक्ति राज्यपाल के स्वर विवेक के अधीन है विधायक निम्न स्थितियों में राष्ट्रपति के विचार आज सुरक्षित रखा जा सकता है
(1) विधायक असंवैधानिक प्रतीत हो
(2) देश के व्यापक हित के विरुद्ध हो या राष्ट्रीय महत्व का हो
(3) नीति निर्देशक तत्वों के परोक्ष रूप से विरुद्ध हो
(4) उच्च न्यायालय की स्थिति को खतरे में डालता हो
(5) विधायक अनुच्छेद 31(3) के तहत संपत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण से संबंधित हो
परिस्थितिजन्य विवेकाधीन शक्तियां-
निमन परिस्थितियों में राज्यपाल को  विवेक से निर्णय लेने का अवसर प्राप्त होता है-
(1) राज्य विधानसभा में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त में हो या सरकार को बहुमत का विश्वास नहीं रहा हो
(2) विभिन्न दलों की संयुक्त सरकार का गठन हो और उसमें आप से विचार विभिन्न नेता के कारण शासन का संचालन सुचारु रुप से चलना असंभव हो रहा हो
(3) राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो गया हो या उसकी आशंका हो
(4) मुख्यमंत्री से सूचना प्राप्त करना राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री से सूचनाएं प्राप्त करना भी विवेका अधिकार के अंतर्गत आता है अनुच्छेद 167( ए )के अनुसार यह मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि वह मंत्रिमंडल के राज्य प्रशासन संबंधी तथा नहीं विधायकों संबंधी निर्णयों से राज्यपाल को अवगत कराएं
* श्रीमती प्रतिभा पाटिल राज्य की प्रथम महिला राज्यपाल बनी थी वह यहां से इस्तीफा देखकर देश के राष्ट्रपति निर्वाचित हुई
* राज्यपाल श्री दरबार सिंह, श्री निर्मल चंद जैन ,श्री शैलेंद्र सिंह ,एवं श्रीमती प्रभा राव ,का राज्यपाल पद पर रहते हुए निधन हो गया था
* राज्य के सर्वाधिक समय तक रहे राज्यपाल सरदार गुरुमुख निहाल सिंह थे

सीकर किसान आंदोलन

सीकर किसान आंदोलन का प्रारंभ सीकर ठिकाना के नए राव राजा कल्याण सिंह द्वारा 25 से 50% तक भू राजस्व वृद्धि करने से हुआ 1922 ईस्वी में उसने पूर्व राव राजा के दाह संस्कार का स्वयं के गद्दी सीन समारोह पर अधिक खर्च का बहाना बनाकर इस वायदे पर लगान वर्दी की कि अगले वर्ष लग्न में रियायत दी जाएगी किंतु 1923 ईस्वी में रामराजा हरियाली देने संबंधी अपने पुराने वादे से मुकर गया राजस्थान सेवा संघ के मंत्री रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में किसानों ने इसके विरुद्ध आवाज उठाई लंदन से प्रकाशित होने वाले डेली होराल्ड नामक समाचार पत्र में किसानों के समर्थन में लेख छपे और 1925 में ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस में लीचेस्टर से लेबर सदस्य सर पथिक लॉरेंस ने किसानों के समर्थन में आवाज उठाई
1931 ईस्वी में राजस्थान जाट क्षेत्रीय सभा की स्थापना के बाद किसान आंदोलन को नई ऊर्जा मिली किसानों को धार्मिक आधार पर संगठित करने के लिए ठाकुर देशराज ने पटना में एक सभा का जाट प्रजापति वहां यह करने का निश्चय किया वसंत पंचमी 20 जनवरी 1934 को सीकर में यही आचार्य खेमराज शर्मा की देखरेख में यह यह गर्म हुआ यज्ञ की समाप्ति के बाद किसान विज्ञप्ति हुकम सिंह को हाथी पर बैठा का जुलूस निकालना चाहते थे किंतु राव राजा कल्याण सिंह और ठिकाने के जागीदार इसकी विरुद्ध है इसका कारण यह था कि ठिकाने का शासक और जागीदार किसानों को सामाजिक प्रतिष्ठा की दृष्टि से अपने से हीन मानते थे और हाथी पर सवार होकर निकाले जाने वाले जुलूस को अपना विशेष अधिकार मानते थे इस कारण सीकर ठिकाने ने यह की पहली रात हाथी को चुरा लिया की घटना ने वहां उपस्थित लोगों में रोष पैदा करने का कार्य किया और माहौल तनावपूर्ण हो गया प्रसिद्ध किसान नेता छोटू राम ने जयपुर महाराजा को तार द्वारा सूचित किया कि एक भी किसान को कुछ हो गया तो अन्य स्थानों पर भारी नुकसान होगा और जयपुर राज्य को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेगे किसानों के गाने को जाने के लिए प्रदान किया दिन तक चलने वाले इस यज्ञ कार्यक्रम में स्थानीय लोगों सहित उत्तर प्रदेश पंजाब लोहारू पटियाला और हिसार जैसे स्थानों से लगभग 300000 लोग उपस्थित हुए बीसवीं शताब्दी में राजपूत आने में होने वाला यह सबसे बड़ा यज्ञ था
सीकर किसान आंदोलन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही हो हटके ठाकुर मानसिंह द्वारा सोदिया का बास नामक गांव में किसान महिलाओं के साथ किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में 25 अप्रैल 1934 ईस्वी को कटराथल नामक स्थान पर श्रीमती किशोरी देवी की अध्यक्षता में एक विशाल महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया सीकर ठिकाने ने उक्त सम्मेलन को रोकने के लिए धारा 144 लगा दी इसके बावजूद कानून तोड़कर महिलाओं का यह सम्मेलन हुआ इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया जिनमें श्रीमती दुर्गादेवी शर्मा श्रीमती फूलन देवी श्रीमती रमा देवी जोशी श्रीमती उमा देवी आदि प्रमुख थे 25 अप्रैल 1935 को जब राजस्व अधिकारियों का दल लगान वसूल करने के लिए कुंदन गांव पहुंचा दो एक वृद्ध महिला दादी दादी द्वारा उत्साहित किए जाने पर किसानों ने संगठित होकर लगान देने से इंकार कर दिया पुलिस द्वारा किसानों के विरोध का दमन करने के लिए गोलियां चलाई गई जिसमें 4 किसान चेतराम टिकु राम सा राम तथा आसाराम शहीद हुए और 175 को गिरफ्तार किया गया इस हत्याकांड के बाद सीकर किसान आंदोलन की गूंज एक बार फिर ब्रिटिश संसद में सुनाई दी 1935 ईस्वी के अंत तक किसानों की अधिकांश मांगे स्वीकार कर ली गई आंदोलन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख नेताओं में सरदार हरलाल सिंह नेतराम सिंह गोरीर पन्ने सिंह अरुण सिंह पल थाना गौरव सकटराथल ईश्वर सिंह भैरूपुरा लेख राम आदि शामिल थे
    बरड किसान आंदोलन (बूंदी)
बिजोलिया और बेंगू के किसानों के समान बूंदी राज्य के किसानों को भी अनेक प्रकार की लागते और ऊंची दरों पर लगान के रकम देनी पड़ती थी इससे त्रस्त बिजोलिया की सीमा से जुड़े बूंदी राज्य के बरेड़ सत्र के किसानों ने बूंदी प्रशासन के विरुद्ध अप्रैल 1922 में आंदोलन का श्रीगणेश कर दिया इस आंदोलन का नेतृत्व राजस्थान संघ सेवा के कर्मठ कार्यकर्ता नानूराम शर्मा के हाथों में था 2 अप्रैल 1923 ईस्वी को डाबी गांव में नानूराम शर्मा की अध्यक्षता में चल रही किसानों की सभा पर पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन के नेतृत्व में गोलियां चलाई गई जिसमें नानक भील और देव लाल गुर्जर शहीद हुए 27 सितंबर 1925 को राजस्थान सेवा संघ की हाडोती साका की एक सभा में शासन को किसानों की समस्याओं से परिचित करवाने के लिए पंडित नैनू राम शर्मा को अधिकृत किया गया 1927 ईस्वी के बाद राजस्थान सेवा संघ अंते विरोधियों के कारण बंद हो गया अतः राजस्थान सेवा संघ के साथ ही बूंदी का बरड किसान आंदोलन समाप्त हो गया

तेजाजी का जीवन परिचय

तेजाजी का जीवन परिचय
नाम -तेजाजी
पिता -ताहर जी
माता -रामकुंवरी
वंश -धोलिया वंश
गांव -खरनाल
अस्त्र- भाला
सवारी -घोड़ी
घोड़ी का नाम- लीलन
तेजाजी के पिता खरनाल के मुख्य थे यह कथा तेजाजी का विवाह  बचपन में ही पनेर गांव में रायमल जी की पुत्री पेमल के साथ हो गया था किंतु शादी के कुछ ही समय बाद उनके पिता और पेमल के मामा में कहासुनी हो गई और तलवारें चल गई जिसमें पेमल के मामा की मौत हो गई इस कारण उनके विवाह की बात किसी ने तेजाजी को नहीं बताई एक बार तेजाजी को उनकी भाभी ने तानों के रूप में ही बात उनसे कह दी तब तानों से त्रस्त होकर अपने पत्नी पेमल को लेने के लिए घोड़ी लीलन पर सवार होकर अपनी ससुराल पनेर गए रास्ते में तेजाजी को एक सांप आग में जलता हुआ मिला तो उन्होंने उस सांप को बचा लिया किंतु वह साप जोड़े से बिछड़ जाने के कारण अत्यधिक क्रोध हुआ और उन्हें डसने लगा तो उन्होंने साप लौटते समय  डस लेने का वचन दिया और ससुराल के आगे बढ़े वहां की अज्ञानता के कारण ससुराल पक्ष से उनकी अवज्ञा हो गई नाराज़ तेजाजी वहां से वापस लौटने लगे तो पेमल से उनकी पहली मुलाकात उसकी  सहेली लाचा गुजरी के यहां हुई उसी रात लाचा गुजरी की गाय मेर के मीणा चुरा ले गए लाचा के प्रार्थना पर वचन बंद होकर तेजाजी ने मीणा लुटेरों से संघर्ष कर गाय छुड़ाई इस गोरक्षा युद्ध में तेजाजी अत्यधिक घायल हो गए वापस आने पर वचन की पालना में सांप के बिल पर आए तो तब पूरे शरीर पर घाव होने कारण जीभ पर साप को कटवाया किशनगढ़ के पास सुरसुरा मे सर्प दंश से  उनकी मृत्यु भाद्रपद शुक्ल मिति 1107 तदनुसार 28 अगस्त 1103 को हो गई तथा पेमल ने भी उनके साथ जान दे दी उस सांप ने उनकी वचनबद्ध से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया इसी वरदान कारण तेजाजी भी सांपों के देवता के रूप में पूज्य हुए गांव गांव में तेजाजी के देवरे स्थान में उनकी तलवार धारी अश्वरोई मूर्ति के साथ नाग देवता की मूर्ति भी होती है इन देवरो में सांप के काटने पर जहर जूस कर निकाला जाता है तथा तेजाजी की तांत बांधी जाती है तेजा जी के निर्वाण दिवस भाद्रपद शुक्ल दशमी को तेजा दशमी के रूप में मनाया जाता है तेजाजी धोलिया गोत्र जाट परिवार में हुआ धोलिया शासको की वंशावली इस प्रकार रही-
(1) महारावल
(2)भीमसेन
(3)पीलापंजर (4)सारंगदेव (5)शक्ति पाल (6)रायपाल(7)
धवलपाल(8)नयनपाल (9) घर्षणपाल (10)तकपाल (11)मूलसेन (12)रतनसेन (13)शुंडल(14) कुंडल(15)पिपल(16) उदयराज(17)नरपाल(18) कामराज(19) बोहितराव(20)ताहरदेव (21)तेजाजी
तेजाजी ने 11 वीं सदी में गायों की डाकुओं से रक्षा करने अपने प्राण दाव पर लगा दिए थे वह खरनाल गांव के निवासी थे भादो शुकल दसमी को पूजन होता है तेजाजी का भारत में जाटों में महत्वपूर्ण स्थान है तेजाजी सत्यवादी और दिए हुए वचन पर अटल थे उन्होंने अब अपने हाथों बलिदान तथा सदाचारी जीवन में अमरत्व प्राप्त किया था उन्होंने अपने धार्मिक विचार से जनसाधारण को क्षेत्र मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया और जन सेवा के कारण निष्ठा अर्जित की जात पात की बुराइयों पर रोक लगाई सूत्रों को मंदिर में प्रवेश दिलाया पुरोहितों के आडंबर का विरोध किया तेजाजी के मंदिरों में निम्न वर्गों के लोग पुजारी का काम करते हैं समाज सुधार का इतना पुराना कोई और नहीं है उन्होंने जनसाधारण के हृदय में सनातन धर्म के प्रति लुप्त विश्वास को पुणे जागृत किया इस प्रकार तेजाजी ने अपने अधिकारियों एवं प्रवचनों से जनसाधारण में नव चेतना जागृत कि लोगों की जात पात मैं आस्था कम हो गई कर्म शक्ति भक्ति वैराग्य का एक साद समायोजन दुनिया में सिर्फ वीर तेजाजी के जीवन में ही देखने को मिलता है
तेजाजी राजस्थान मध्यप्रदेश और गुजरात प्रांतों में लोक देवता के रूप में पूजे जाते हैं किसान वर्ग अपनी खेती की खुशहाली के लिए तेजाजी को पूजता है तेजा जी के वंशज मध्य भारत के खिलचीपुर से आकर मारवाड़ में बसे थे नागवंश के धवलराम  के नाम पर धोलिया गोत्र शुरू हुआ तेजाजी के बुजुर्ग उदय राज खरनाल पर कब्जा कर अपनी राजधानी बनाया खरनाल परगने में 24 गांव थे तेजाजी की माता थाकण जाट की बेटी थी
तेजाजी के भारत में अनेक मंदिर है तेजाजी के मंदिर राजस्थान मध्य प्रदेश गुजरात व हरियाणा में प्रसिद्ध है प्रसिद्ध इतिहासकार श्री पी एन ओके का दावा है कि ताजमहल शिव मंदिर है जिस का असली नाम तेजो महालय आगरा मुख्यत जाटों कि नगरी है जाट लोग भगवान शिव को तेजाजी के रूप में  जानते हैं द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया के डाट विशेषांक के अनुसार जाट लोगों के तेजा मंदिर हुआ करते थे अनेक शिवलिंग में एक तेजलिंग भी होता है जिसके जाट लोग उपासक थे इस वर्णन से भी ऐसा प्रतीत होता है कि ताजमहल भगवान तेजाजी का निवास स्थल तेजो महालय था श्री पी एन ओके अपनी पुस्तक ताजमहल इस हिंदू टेंपल प्लेस में 100 से भी अधिक प्रमाण पत्र देकर दावा करते है कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है जिस का असली नाम तेजो महालय है
तेजाजी के जन्म के बारे में मत है-
जाट वीर धौलिया  वंश गांव खरनाल में के माई
आज दिन सुभस भंसे बस्ती फुला छाय
शुभ दिन चौदस वार गुरु, शुक्र माघ पहचान
 सस्त्र 130 के में प्रकटे अवतारी ज्ञान


बिजोलिया किसान आंदोलन राजस्थान

*बिजोलिया किसान आंदोलन राजस्थान के अन्य किसान आंदोलनों का अगुवा रहा है यहां के किसानों में अधिकांश धाकड़ जाति के थे 1994 में बिजोलिया के राव गोविंद दास की मृत्यु तक किसानों को जागीरदार के खिलाफ कोई विशेष शिकायत नहीं थी 1994 ईस्वी में बने नए जागीरदार किशोर सिंह ने किसानों के प्रति ठिकाने की नीति वह जागीर प्रबंध में परिवर्तन किया इसके समय में लगभग छोरियां से प्रकार के लोग बाघों के द्वारा किसानों से उनकी मेहनत की कमाई का लगभग 87% भाग जागीरदार ले लिया करता था इसके बाद भी उनसे बेकार अलग से करवाई जाती थी
*1897 ईसवी में गिरधरपुरा नामक गांव में गंगाराम धाकड़ के पिता के मृत्यु भोज के अवसर पर हजारों किसानों ने अपने कष्टों को खुलकर चर्चा की और मेवाड़ महाराणा को अवगत करवाया महाराणा ने सुनवाई के बाद किसानों की लागत और बेगार संबंधित शिकायतों की जांच के लिए सहायक राजस्व अधिकारी हामिद हुसैन को नियुक्त किया हामिद हुसैन ठिकाने के विरुद्ध महकमा खास मे रिपोर्ट दी किंतु उसका कोई परिणाम नहीं निकला राज्य की तरफ से ठिकाने को मात्र 1-2 लागत कम करने को कहा गया इससे राव कृष्ण सिंह का हौसला बढ़ गया
*विभिन्न प्रकार की लागो व 1899 से 1900 के बैंकर दुर्भिक्ष (छपनिया  काल )के कारण बिजोलिया  के किसानों की स्थिति पहले से काफी दयनीय थी इसके बावजूद 1903 में राव कृष्ण सिंह ने किसानों पर चवरी  नामक एक और नया कर लगा दिया इसमें हर व्यक्ति को अपनी लड़की के विवाह के अवसर पर ₹5 ठिकाने के कोष में जमा करवाना पड़ता था चवरी कर बिजोलिया वासियों के लिए आर्थिक रूप से तो भार स्वरूप था ही साथ ही साथ सामाजिक रूप से गोरअपमान जनक भी था किसानों ने इसका मोन विरोध किया और 2 वर्ष तक अपनी कन्याओं का विवाह नहीं किया किसानों के प्रतिरोध के आगे राव को चवरी की लाग उठा देने फसल में ठिकाने का हिस्सा 2/5कुंता करने वाले कारों के साथ बीसीओ आदमियों को नहीं बुलाने की घोषणा करनी पड़े
*1986 में बिजोलिया के नए स्वामी पृथ्वी सिंह ने न केवल पुरानी यादों को समाप्त कर दिया बल्कि परजा पर तलवार बंधाई नमक नया कर लगा दिया राव पृथ्वी सिंह के समय जब लूट और शोषण चरम सीमा को पार कर गया तो 1913 ईस्वी में किसानों ने साधु सीतारामदास फतेह करण चारण और ब्रह्मदेव के नेतृत्व में जागीर क्षेत्र में हल चलाने से इनकार कर दिया जागीर सेत्र की भूमि पर रहने के कारण ठिकाने को बड़ी हानि उठानी पड़ी इसके बाद ठाकुर द्वारा की जाने वाली शक्ति हुए अत्याचारों में और भर्ती हो गई फतेह करण चारण ने महादेव आतंकित होकर बिजोलिया छोड़ कर चले गए तथा साधु सीतारामदास को पुस्तकालय की नौकरी से अलग कर दिया गया साधु सीताराम दास द्वारा आमंत्रित करने के बाद विजय सिंह पथिक ने आंदोलन का नेतृत्व संभाला और 1917 ईस्वी में हरियाली अमावस्या के दिन मेरी साल गांव में और माल पंच बोर्ड नामक एक संगठन स्थापित कर उस के तत्वाधान में आंदोलन का श्रीगणेश किया गया तिलक ने किसानों की वीरता और संगठन से प्रभावित होकर ने केवल अपने अंग्रेज पत्र मराठा में बिजोलिया के बारे में संपादकीय लिखा अपितु मेवाड़ के महाराणा को पत्र लिखा कि मेवाड़ के राज में स्वतंत्रता के लिए बलिदान की आप स्वतंत्रता के पुजारी हैं आपके राज्य में स्वतंत्रता के उपवास को जेल में डालना कल की बात है या के किसानों को जागृत करने के लिए एक और माणिक्य लाल वर्मा द्वारा रचित पंछीड़ा गीत गाए जा रहा था वहीं दूसरी ओर भंवरलाल स्वर्णकार भी अपनी कविताओं के माध्यम से गांव गांव में अलग जगह रहे थे पथिक ने बिजोलिया के आसपास के इलाके के युवाओं में देश भक्ति की भावना भरने के उद्देश्य से इस समय ऊपर माल सेवा समिति नामक संगठन की स्थापना की तथा उत्तर माल का ढंग  के नाम से पंचायत का एक पत्र भी निकलवाया आंदोलन को देश भर में चर्चित करने के लिए पथिक ने किसान की तरफ से कानपुर से निकालने वाले समाचार पत्र प्रताप के संपादक गणेश शंकर विद्यार्थी को चांदी की राखी भेजी गणेश शंकर विद्यार्थी ने राखी स्वीकार करते हुए आंदोलन को समर्थन करने का आश्वासन दिया प्रताप समाचार पत्र ने बिजोलिया किसान आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दिलवाई प्रेमचंद के उपन्यास रंगभूमि में मेवाड़ के आंदोलन का चित्रण किया गया है वह बिजोलिया किसान आंदोलन का ही प्रतिबिंब है
*उदयपुर राज्य सरकार ने अप्रैल 1919 में बिजोलिया के किसानों की शिकायत की सुनवाई करने के लिए मांडलगढ़ हकीम बिंदु लाल भट्टाचार्य की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया आयोग ने किसानों के पक्ष में अनेक सिफारिशें की किंतु मेवाड़ सरकार द्वारा इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिए जाने के कारण आंदोलन को जारी रहा भारत सरकार ने विदेश विभाग के अधिकारियों का मत था कि बिजोलिया किसान पंचायत के साथ शीघ्र समझौता किया जाना आवश्यक है अन्यथा संपूर्ण राजपूताने में किसान आंदोलन उग्र हो सकता है ऐसी स्थिति में बिजोलिया आंदोलन को तुरंत शांत करने के उद्देश्य से राजस्थान के एसजीजी रोबोट पोलैंड की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया फरवरी 1922 में रोबोट होलेंड ने किसानों से वार्ता कर 35 लागतो को माफ कर दिया दुर्भाग्य से ठिकाने की कुटिलता के कारण यह समझौता स्थाई नहीं हो सका
1927 ईस्वी के नए बंदोबस्त के विरोध में किसानों ने ठिकाने पर दबाव बनाने के लिए विजय सिंह पथिक से परामर्श के बाद लगान की ऊंची दरों के विरोध में अपनी माल भूमि छोड़ दी मगर किसानों की धारणा के विपरीत ठिकाने द्वारा भूमि की नीलामी के जाने पर भूमि को लेने वाले नए किसान मिल गए किसानों द्वारा भूमि छोड़ने के फैसले के लिए पथिक को उत्तरदाई ठहराया गया जिसके बाद उन्होंने अपने को इस आंदोलन से अलग कर दिया इसके बाद किसानों ने अपनी भूमि को  वापस प्राप्त करने के लिए आंदोलन जारी रखा जो 1941 तक चलता रहा इस प्रकार बिजोलिया किसान आंदोलन चला यह आंदोलन बिजोलिया किसानों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव रहा




हनुमान बेनीवाल

नाम= हनुमान बेनीवाल
पिता= स्वर्ग श्री रामदेव जी बेनीवाल
माता =श्रीमती मोहिनी देवी
जन्म दिनांक =2 मार्च 1972
शिक्षा= एलएलबी को ऑपरेटिव में डिप्लोमा राजस्थान विश्वविद्यालय से
पत्नी का नाम =श्रीमती कनिका बेनीवाल
संतान=
(1) पुत्री दिया बेनीवाल
(2) पुत्र आशुतोष बेनीवाल
*ननिहाल =पिडेल गोत्र जाट जलगांव, मूंडवा
*ससुराल =श्री कृष्ण जी गोदारा सरदारपुरा जीवन (श्री गंगानगर)
*राजनीतिक विवरण
*1994 में राजस्थान कॉलेज के अध्यक्ष बने
*1995 में दोबारा राजस्थान कॉलेज के अध्यक्ष बने
*1996 में राजस्थान विधि कॉलेज के अध्यक्ष बने
*1997 में राजस्थान विश्वविद्यालय के अध्यक्ष बने
*2003 में मूंडवा विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े मगर 2000 वोटों से हार गए
*2008 में बीजेपी के टिकट पर नवगठित विधानसभा खीवसर से चुनाव लड़ा और नागौर जिले की सभी सीटों पर सबसे बड़ी जीत हासिल की
*2013 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खीवसर विधानसभा सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के दुर्ग सिंह चौहान को 24600 वोटों से हराकर दूसरी बार जीत हासिल की
*आपके पिता चौधरी रामदेव जी बेनीवाल 3 बार मूंडवा विधानसभा के अध्यक्ष रहे
*मूल निवास =बरणगांव जिला नागौर
*वर्तमान निवास= b7 एमएलए क्वार्टर जालूपुरा थाने के पास जयपुर
*ईमेल -mlahnumanbeniwal@gmail.com
* आप राजस्थान नहीं अपितु पूरे देश में आपको किसान को उनके सच्चे साथी हैं हक के लिए लड़ने वाले अन्याय के खिलाफ अपनी दबंग आवाज आने के उपचार से झंडा गाड़ने वाले से जाना चाहते हैं
*आप की विशेषता के कारण आज आप राजस्थान प्रदेश के युवाओं की पहली पसंद बन चुके हो एवं आप की लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है
*आप की बढ़ती लोकप्रियता से चलकर कुछ समाज कंटको ने 23 सितंबर 2015 को आप पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया ईश्वर की कृपा से सकुशल बच गए आप की लोकप्रियता एवं दिल में बसने वालों  का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आप पर हुए हमले के विरोध में समूचे राजस्थान में 200 से अधिक जगहों पर प्रदर्शन हुए राजस्थान यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन हुआ पुलिस ने दोषियों पर लाठियां बरसाई जिसमें घायल हुए आज भी जयपुर के थाने मैं आपके पसंद है
* इसके अलावा भी अनेक बातें हैं जिनको लिखते लिखते शायद गुजर जाए इतना ही कहना चाहूंगा
*

आप जैसा नेता आज तक इस प्रदेश में नहीं हुआ राजस्थान की जनता को आपसे बहुत उम्मीद है ईश्वर आपको सब कुशल रखे

महाराणा प्रताप का जीवन परिचय

    महाराणा प्रताप का जीवन परिचय  


जन्म = 9 मई 1540
स्थान =कुंबलगढ के बादल महल मे 
पिता =उदयसिंह
माता =जैवंता बाई 
*महाराणा प्रताप का बचपन कुम्भलगढ दुर्ग मे व्यतीत हुआ महाराणा परताप का विवाह 1557 मे अजब दे पवार के साथ हुआ जिनसे 16 मार्च 1559 मे अमरसिह का जनम हुआ  महाराणा परताप 32 वर्ष की उम्र के थे तब उनके पिता उदयसिंह की होली के दिन 28 फरवरी 1557 गोगुन्दा में मृत्यु हो गयी  उदयसिंह का गोगुन्द में ही दहसंस्कार किया गया यहां स्थित महादेव बावड़ी पर 28 फरवरी 1557 को मेवाड़ के सामंतो एव प्रजा ने प्रतापसिंह का महाराणा के रूप में राजतिलक किया 
*1570 में अकबर का नागौर में दरबार लगा जिसमे मेवाड़ के अलावा अधिकतर राजपूतो ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली  अकबर ने परताप को अधीनता स्वीकार करवाने के लिए चार दल भेजे जिनमे -
पहली बार -जलाल खा जिसको नवम्बर 1572 में परताप के पास भेजा 
दूसरी बार -जून 1573 में मानसिह को परताप को समझाने भेजा 
तीसरी बार -अक्टुम्बर 1573 मे आमेर के भगवानदास को भेजा 
चौथी बार -दिसम्बर 1573 में टोडरमल को भेजा 
*ये चारो सिस्टमण्डल प्रताप को समझाने में असफल रहे तो अकबर ने परताप को युद्ध में बंदी बनाने की योजना बनाई बंदी बनाने की योजना अजमेर के किले में बनाई गयी जिसमे आज संग्रालय स्थित है तथा  अंग्रेजो के समय का सशत्रागार होने के कारण इसे मैगजीन भी कहते हे अकबर ने मानसिह को इस युद्ध का मुख्य सेनापति बनाया तथा मानसिह का सहयोगी आसफखां को नियुक्त किया गया
*मानसिंह 3 अप्रैल 1576 को शाही सेना लेकर अजमेर से रवाना हुआ उसने पहला पड़ाव मांडलगढ़ में डाला दो माह तक वहीं पर है उसके बाद है आगे नाथद्वारा से लगे हुए खमनोर के मूल लैला नामक गांव के पास अपने पड़ाव डाला उधर इस शाही सेना के आगमन की सूचना महाराणा प्रताप को मिल गई
*महाराणा प्रताप ने गोगुंदा और खमनोर की पहाड़ियों के मध्य स्थित हल्दीघाटी नामक तंग घाटी में अपना पड़ाव डाला है इस गाड़ी में एक बार में एक आदमी प्रवेश कर सकता था इसलिए सैनिकों की कमी होते हुए भी महाराणा प्रताप ने के लिए मोर्चा बंदी के लिए बस यह सर्वोत्तम स्थान था जहां पर ताव के पहाड़ों से परीक्षित से ने आसानी से छिपकर आक्रमण कर सकते थे वही मुगल सैनिक भटक कर मेवाड़ के सैनिकों से टकरा कर या भूखे प्यासे मर कर जीवन गमा सकते हैं दोनों सेनाएं 18 जून 1576 को प्रातकाल युद्ध बेरी के साथ आमने-सामने हुई
राजपूतों ने मुगलों पर पहला बार इतना कर्म किया कि मॉडल सैनिक चारों और जान बचाकर भागे यह प्रथम चरण के युद्ध में हकीम खां सूर का नेतृत्व सफल रहा मुगल इतिहासकार बंदा यूनी जो कि मुगल सेना के साथ था वह स्वयं भी उस युद्ध से भाग खड़ा हुआ मुगलों की आरक्षित फौज के प्रभारी 72 खाने यह झूठी अफवाह फैला दी की बार 7 वर्षों से सेना लेकर आ रहे हैं अकबर के सहयोग की बात सुनकर मुगल सेना की हिम्मत बंधी और पुणे युद्ध के लिए तत्पर और आगे बढ़ी राजपूत भी पहले मोर्चे में सफल होने के बाद बनास नदी के किनारे वाले मैदान में जिसे रक्तदान कहते हैं उसमें आज हमें इस युद्ध में राणा और से पूना व रामप्रसाद हाथी और मुगलों की ओर से गजमुक्ता व गजराज के मध्य युद्ध हुआ रामप्रसाद हाथी के महावत के मारे जाने के कारण रामप्रसाद हाथी मुगलों के हाथ लग गया राम सा धरती अकबर के लिए बड़े महत्व का था जिसका नाम अकबर ने पीर प्रसाद कर दिया था
महाराणा प्रताप की नजर मुगल सेना के सेनापति मानसिंह पर पड़ी स्वामी भक्त घोड़े चेतक ने स्वामी का संकेत समझ कर अपने कदम उस और बढ़ाएं जिधर मुगल सेनापति मानसिंह मर्दाना नामक हाथी पर बैठा हुआ था चेतक ने अपने शेर हाथी के सिर पर टिका दिए महाराणा प्रताप ने अपने पाले का भरपूर पर हार मानसिक पर किया परंतु मानसिंह पौधे में छिप गया और उसके पीछे बैठा अंगरक्षक मारा गया जय हो देखी छतरी का एक खंभा टूट गया इसी समय हाथी की सूंड से बंधे हुए जहरीले से चेतक की टांग कट गई
उसी समय मुगलों की शाही सेना ने प्रताप को चारों ओर से घेर लिया बड़ी सादड़ी का झाला मन्ना सेना को चीरता हुआ राणा के पास पहुंचा और महाराणा से निवेदन किया कि आप राज सिंह उतार कर मुझे दे दीजिए और आप इस समय युद्ध के मैदान से चले जाएं इसी में मेवाड़ की भलाई है चेतक के घायल होने की स्थिति को देखकर राणा ने वैसा ही किया राज सिंह के बदलते ही सैनिक सैकड़ों तलवारें झाला मन्ना पर टूट पड़ी झाला मन्ना इन पहाड़ों का भरपूर सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ
महाराणा प्रताप का स्वामी भक्त घोड़ा चेतक बलीचा गांव में स्थित एक छोटा नाला पार करते हुए परलोक सिधार गया इसी जगह बलीचा गांव में चेतक की छतरी बनी हुई है महाराणा प्रताप जो कभी भी किसी परिस्थिति में नहीं रहे परंतु चेतक की मृत्यु पर उनकी आंखों में आंसू निकल पड़े उसी समय नीला घोड़ा रा असवार शब्द राणा ने सुने प्रताप में सिर उठा कर देता तो सामने उसके भाई से किसी को पाया शक्ति सिंह ने अपने करने पर लज्जित होकर बड़े भाई के चरण पकड़ कर शमा याचना की महाराणा प्रताप ने उन्हें गले लगाया और क्षमा कर दिया इसकी जानकारी हमें अमर काव्य वंशावली ग्रंथ विराज प्रसिद्ध से मिलती है जिसकी रचना संस्कृत भाषा में रणछोड़ नामक विद्वान ने की
कुछ इतिहासकारों ने इसे परिणाम विभिन्न तत्व इंग्लिश युद्ध के संज्ञा दी है
अकबर का उद्देश्य महाराणा प्रताप को जीवित पकड़कर मुगल दरबार में खड़ा करना अथवा मार देना था या फिर उसका संपूर्ण राज्य अपने साम्राज्य में मिला देना था लेकिन अकबर इन उद्देश्यों में विफल रहा
मुगल सेना की विजय प्रमाणित नहीं होती है क्योंकि अकबर की मानसिंह वेयर साबका के प्रति नाराजगी जिसमें उनकी जोड़ी बंद कर दी गई मुगल सेना का मेवाड़ में बेकस होकर समय निकालना एवं मेवाड़ की सेना का पिक्चर नहीं करना ऐसे परिदृश्य हैं जो हल्दीघाटी युद्ध का परिणाम प्रताप के पक्ष में लाकर खड़ा कर देते हैं
विदेशी इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने हल्दीघाटी को मेवाड़ की धर्मों पल्ली और दीवार को मेवाड़ का मैराथन कहा है
1597 से में धनुष की प्रसंता चढ़ाते हुए महाराणा प्रताप के चोट लगी जिसके कारण 19 जनवरी 1597 ईस्वी को उसके चावंड में मृत्यु हो गई चांद से 11 मील दूर बडोली गांव के निकट रहने वाले नाले के तट पर महाराणा का दाह संस्कार किया गया के खेजड़ बांध के किनारे 8 खंभों की छतरी आज भी हमें उस महान योद्धा की याद दिलाती है
प्रताप की मृत्यु का समाचार अकबर के कानों तक पहुंचा तो उसे भी बड़ा दुख हुआ इसी स्थिति का वर्णन अकबर के दरबार में उपस्थित दूर सा अड्डा ने इस प्रकार किया - किराणा तेरी मृत्यु पर बादशाह ने दांत में जीव दवाई और नीम श्वास से आंसू टपका है क्योंकि तूने अपने घोड़े को नहीं दबाया और अपनी पगड़ी को किसी के सामने नहीं झुकाया वास्तव में तो सब तरह से जीत गया

राजस्थान एक परिचय

                      राजस्थान एक परिचय 

संस्कृति संपदा की दृष्टि से संपन्न हुए समृद्ध भक्ति और शौर्य का संगम स्थल बताएं साहित्य कला एवं संस्कृति की त्रिवेणी राजस्थान हमारे देश का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है यह देश के उत्तर पश्चिमी भाग में स्थित है यहां का सांस्कृतिक वैभव बेजोड़ है साहसी वीर गौरव में संस्कृति त्याग एवं बलिदान की प्रतिमूर्ति नारियों शौर्य उदारता आदि भावनाओं का सर्वाधिक संचार मानव संपूर्ण विश्व में ऐसी भूमि पर हुआ है राजस्थान के लगभग मध्य से निकलने वाली तथा इसे दो चल रहा है भागो में विभक्त करने वाली वे राज्य की रीड की हड्डी कही जाने वाली अरावली पर्वत माला है उससे प्रभावित होने वाले अनेक महत्वपूर्ण सरिता यथा बनास बैंक बाणगंगा लूनी आदि प्रागैतिहासिक काल से लेकर आज तक ही मानव सभ्यताओं के उत्थान एवं पतन के साक्षी रही है इस भूभाग में निम्न पुरापाषाण युग उत्तर पाषाण काल काशी योगेश सिंधु सभ्यता की मानव बस्तियां प्राचीनतम ताम्र युगीन मानव सभ्यता एवं वैदिक सभ्यता खुली खुली और चिरकाल में इसी भूमि के गर्भ में विलीन हो गई जिनके अवशेष उत्खनन में यदा कदा पुरातात्विक अवशेषों के रूप में मिलते रहे हैं जो यहां की समृद्ध प्राचीन धरोहर का ज्रिक दर्शन कराते हैं यहां की शौर्य गाथा वीरों के पराक्रम के किस्से लोग धर्म  विराट विरासत सदियों से तपस्वी मनुष्य की तरह रेत की चादर ओढ़े निस्वार्थ भाव से भारत माता की सांस्कृतिक विरासत को अपना सब कुछ न्योछावर करती रही है और उसे विश्व में और समृद्ध बनाते रहिए

इस मरू प्रधान प्रदेश को समय-समय पर विभिन्न नामों से पुकारा जा रहा है महेश्वरी वाल्मीकि ने इस भूभाग के लिए मरू कांता रे शब्द का प्रयोग किया राजस्थान शब्द का प्राचीनतम प्रयोग राजस्थानी आदित्य वसंतगढ सिरोही के शिलालेख में हुआ इसके बाद मुंहनोत नैंसी री ख्यात एवं राज रूपक नामक ग्रंथों में भी राजस्थान शब्द का प्रयोग हुआ
छठी शताब्दी में इस राजस्थानी भूभाग में राजपूत शासकों ने अलग-अलग रियासतें कायम कर अपना शासन स्थापित किया इन रियासतों में मेवाड़ के गुहिल मारवाड़ के राठौड़ ढूंढ के कछवाहा में अजमेर के चौहान आदि प्रसिद्ध राजपूत वंश है राजपूत राज्य की प्रधानता के कारण ही कालांतर में इसे भू भाग को राजपूताना कहा जाने लगा राजस्थानी भूभाग के लिए राजपूताना शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 18 साल में जॉर्ज थॉमस द्वारा किया गया कर्नल जेम्स टॉड ने इस राज्य पर देश को राजस्थान कहा क्योंकि कुछ समय स्थानीय बोलचाल एवं लौकिक साहित्य में राजाओं के निवास के प्रांत को राजस्थान के तथ्य ब्रिटिश काल में यह प्रांत राजपूताना या रजवाड़ा तथा अजमेर मेरवाड़ा के नाम से पुकारा जाता था इस भौगोलिक भूभाग के लिए राजस्थान शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग कर्नल जेम्स टॉड ने राजस्थान के इतिहास पर 1829 में लंदन से प्रकाशित अपनी प्रसिद्ध ऐतिहासिक करती इसका नाम सेंट्रल एंड वेस्टर्न राजपूत स्टेट ऑफ इंडिया में किया स्वतंत्रता पश्चात राज्य पुनर्गठन की प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग नामकरण के पश्चात 26 जनवरी 1950 को औपचारिक रूप से इस संपूर्ण देश का नाम राजस्थान स्वीकार किया गया स्वतंत्रता के समय राजस्थान देसी रियासतों 3 ठिकाने कुशलगढ़ लावावे नीमराणा तथा चीफ कमिश्नर अजमेर मेरवाड़ा प्रदेश में विभक्त था स्वतंत्रता के बाद 1950 तक अजमेर मेरवाड़ा को छोड़कर सभी पत्र राजस्थान में सम्मिलित हो गए थे उस समय अजमेर मेरवाड़ा के प्रथम एवं एकमात्र मुख्यमंत्री राजस्थान अपने वर्तमान स्वरूप में 1 नवंबर 1956 में आया

               राजस्थान निर्माण के विभिन्न चरण
प्रथम चरण
प्रथम चरण का नाम मत्स्य संघ रखा गया इसका निर्माण 18 मार्च 1948 को किया गया
 इसमें शामिल होने वाली निम्न रियासते थी अलवर भरतपुर धौलपुर करौली रियासत में नीमराणा ठिकाना

द्वितीय चरण
दितीय चरण का नाम राजस्थान संग रखा गया एवं इसकी स्थापना 25 मार्च 1948 को की गई
 इसमें शामिल होने वाली निम्न रियासतें थी बांसवाड़ा बूंदी डूंगरपुर झालावाड़ कोटा प्रतापगढ़ टो किशनगढ़ ए तथा सहार पुरा रियासते हुए कुशलगढ़ ठिकाना प्रदेश के नाम से में राजस्थान शब्द पहली बार जुड़ा

तृतीय चरण
तृतीय चरण का नाम संयुक्त राजस्थान रखा गया इसकी स्थापना 18 अप्रैल 1948 को की गई
इसमें शामिल होने वाली रियासते हैं निम्न थे राजस्थान संघ में उदयपुर रियासत मिली

चतुर्थ चरण
चतुर्थ चरण में राजस्थान को व्रत राजस्थान नामक नाम दिया गया इसकी स्थापना 30 मार्च 1949 को की गई
 इसमें शामिल होने वाली निम्न रियासतें थी संयुक्त राजस्थान वह जयपुर जोधपुर बीकानेर से जैसलमेर
राजस्थान का गठन इसी तिथि को माना जाता है तथा यह दिन प्रतिवर्ष राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है
7 अप्रैल 1950 को राजस्थान के प्रथम प्रधानमंत्री हीरालाल शास्त्री ने शपथ ग्रहण की

पंचम चरण
पंचम चरण में राजस्थान का संयुक्त वृहत्तर राजस्थान नाम रखा गया इसकी स्थापना 15 मई 1949 को की गई इसके अंदर व्रत राजस्थान में मत्स्य संघ का विलय हुआ

छठा  चरण
छठे चरण में राजस्थान नाम रखा गया इसकी स्थापना जनवरी 1950 में की गई
इसके अंदर शामिल होने वाली निम्न रियासते थी
 इसमें संयुक्त वृहत राजस्थान में सिरोही रियासत का विलय हुआ 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू होने पर इस राज्य को विधिवत रूप से राजस्थान नाम दिया गया

सातवां चरण
सातवें चरण में राजस्थान अपने वर्तमान स्वरूप में आया
1 नवंबर 1956 राजस्थान संघ व अजमेर मेरवाड़ा व आबू दिलवाड़ा तहसील व मध्यप्रदेश का सीमेंट का राज्य में शामिल हुए राज्य के झालावाड़ जिले में एक भाग सिरोंज क्षेत्र को मध्य प्रदेश में मिलाया गया

         राजस्थान के प्रमुख राजवंश व राज्य
राजवंश        -        रियासत
प्रतिहार      - मंडोर भीनमाल जालौर राम
कछुआ        - जयपुर अलवर राम गोहिल मेवाड़ बांसवाड़ा डूंगरपुर उदयपुर चित्तौड़गढ़ राम
 सिसोदिया   -उदयपुर चित्तौड़गढ़ शाहपुरा प्रतापगढ़ राम
चौहान       - अजमेर जालौर सिवाना बूंदी सिरोही कोटा राम
 यादव       - करौली जैसलमेर हनुमानगढ़ राम राठौड़ जोधपुर किशनगढ़ बीकानेर राम
 भाटी    - जैसलमेर हनुमानगढ़ राम
 परमार    - आबू किराडू मालवा राम
 जाला   -  झालावाड़ राम
हाड़ा चौहान   -कोटा बूंदी राम
 जाट      - भरतपुर धौलपुर राम
 मुस्लिम    - टोंक राम
 देवड़ा चौहान - सिरोही राम
 सोनगरा चौहान  - जालौर
 चावड़ा   - भीनमाल राम

आयोग

                                      आयोग     
*राजस्थान राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग- राजस्थान में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत 26 मई 1981 को राज्य आयोग का जयपुर में गठन किया गया जिस के प्रथम अध्यक्ष न्यायाधीश श्री कृष्ण मल लोढ़ा थे

* राजस्व मंडल- अजमेर 1 नवंबर 1949 को भू राजस्व भू-अभिलेख एवं प्रबंध की व्यवस्था हेतु स्थापित अर्ध न्यायिक निकाय प्रथम अध्यक्ष श्री बृजेश चंद शर्मा
 *राजस्थान लोक सेवा आयोग- 20 अगस्त 1950 को अजमेर में स्थापित सर एस के गोश्त प्रथम अध्यक्ष
 *राजस्थान निर्वाचन आयोग राजस्थान पंचायत राज अधिनियम 1994 के तहत इस आयोग का गठन किया गया जो प्रथम निर्वाचन आयुक्त श्री अमर सिंह राठौड़ बने *राजस्थान निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल कार्य ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है इसका मुख्यालय जयपुर में है
 *राजस्थान वित्त आयोग -प्रथम राजस्थान वित्त आयोग का गठन श्री कृष्ण कुमार गोयल की अध्यक्षता में किया गया राजस्थान वित्त आयोग राज्य सरकार व पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी स्थानीय निकायों के मध्य विद के बंटवारे के संबंध में परामर्श देता है वित्त आयोग का गठन प्रत्येक 5 वर्ष हेतु राज्यपाल करते हैं
*लोकायुक्त जयपुर 28 अगस्त 1973 को श्री आईडी दुआ को प्रथम लोकायुक्त बनाया गया
 *राजस्थान सिविल सेवा -इसका गठन राज्य कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों में विवादों के निपटारे के लिए 1 जुलाई 1970 को जयपुर में किया गया अधिकरण की एक्शन पीठ का गठन जोधपुर में किया गया केंद्रीय प्रशासनिक अपीलीय न्यायाधिकरण राज्य में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के सेवा मामलों के नेता ने हेतु जयपुर वे जोधपुर में कार्यरत है
*मुख्य सतर्कता आयुक्त -28 मार्च 2001 को श्री आर के नायर राज्य के पहले मुख्य सतरकता आयुक्त बनाए गए
*मुख्य सूचना आयुक्त सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत राजस्थान सूचना आयोग का गठन कर अप्रैल 2006 में राज्य के पहले मुख्य सूचना आयुक्त श्री एमडी कोरानी को बनाया गया प्रथम केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह थे
 *राज्य मानवाधिकार आयोग- मानव अधिकारों की रक्षा के लिए पहली बार राज्य में मानवाधिकार आयोग का गठन जयपुर में 18 जनवरी 1999 को किया गया आयोग ने 28 मार्च 2001 से कार्य प्रारंभ किया
* राज्य महिला आयोग इस आयोग का गठन 15 मई 1999 को जयपुर में किया गया आयोग के प्रथम अध्यक्ष श्रीमती कांता कथूरिया थी
 *राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण - गठन 7 अप्रैल 1958 को जयपुर में किया गया
 राष्ट्रीय महिला आयोग -केंद्र सरकार ने 31 जनवरी 1992 को नई दिल्ली में इस आयोग की स्थापना की
* 1952 में हुए प्रथम आम चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री जयनारायण विधानसभा चुनाव नहीं जीत सके अध्यक्ष श्री टीकाराम पालीवाल पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने
 *1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन के बाद राज्य प्रमुख का पद समाप्त कर दिया गया वह राज्यपाल का पद सृजित हुआ सरदार गुरुमुख निहाल सिंह राज्य के पहले राज्यपाल बने कुछ समय राज्य के मुख्यमंत्री श्री मोहनलाल सुखाड़िया थे
*राजस्थान की प्रथम महिला सांसद एवं प्रथम महिला राज्यसभा सदस्य श्रीमती शारदा भार्गव जी
*राजस्थान से निर्वाचित प्रथम महिला लोकसभा सदस्य श्रीमती गायत्री देवी
*राज्य से सर्वाधिक बार निर्वाचित महिला लोकसभा सदस्य श्रीमती वसुंधरा राजे
*राजस्थान से अनुसूचित जाति की प्रथम महिला लोकसभा सदस्य श्रीमती सुशीला बंगारू थी
*राजस्थान में अनुसूचित जनजाति की प्रथम महिला लोकसभा सदस्य श्रीमती उषा मीणा थी
                प्रमुख रचनाएं
रचना -  लेखक
पृथ्वीराज रासो- कवि चंद्रवरदाई
हमीर रसो- जोधराज
ढोला मारू रा दूहा- कवि कलोल
गज गुण रूप -केशवदास गाडण
पद्मावत -मलिक मोहम्मद जायसी
वेली किशन रुक्मणी री- पृथ्वीराज राठौड़
अचलदास खींची री वचनीका -शिवदास गाडण
वंश भास्कर -सूर्यमल मिश्रण
चेतावनी रा चूंगट्या -केसरी सिंह बाहरठ
संगत रासो- गिरधर आसिया
बिहारी सतसई -महाकवि बिहारी
राजपूताने का इतिहास -गौरीशंकर हरिश्चंद्र ओझा
खुमाण रासो -दलपत विजय
पृथ्वीराज विजय -जयानक
 मुता नैंसी रि ख्यात- मुंहनोत नैंसी
मारवाड़ रा परगना री विगत -मोहनोत नैंसी
 हमीर महाकाव्य- नयनचंद्र सूरी
बीसलदेव रासो -नरपति नाल्ह
वीर विनोद -कविराज श्यामल दास
बीकानेर रा राठौड़ा री ख्यात- दयालदास
विजयपाल रासो -नरसिंह
बांके दास ख्यात -बाकीदास
प्राचीन लिपि माला -गौरीशंकर हरीश चंद्र ओझा
रणमल छंद -श्रीधर व्यास


सहकारी विकास के नवीन प्रयास

        हकारिता सामाजिक आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है यह एक सबके लिए सब एक के लिए के मूल सिद्धांत पर आधारित है सहकारिता आंदोलन सदस्यों का सदस्यों द्वारा संचालित कार्यक्रम है
* राजस्थान राज्य में सहकारिता आंदोलन की शुरुआत  1904 मे अजमेर में हुई
* 1953 मैं विभिन्न सहकारी कानूनों में एकरूपता के उद्देश्य से राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम पारित किया गया वर्तमान में 14 नवंबर 2002 को नया सहकारी अधिनियम 2001 लागू किया गया है
* नेफेड द्वारा भरतपुर में राज्य के सहकारी क्षेत्र के पहले जीवाणु खाद के कारखाने की स्थापना की गई
* सहकारी स्वीट भंडार जयपुर में अलवर में इसबगोल का कारखाना आबूरोड में तथा जयपुर में बर्फ का कारखाना सहकारी क्षेत्र में संचालित किए जा रहे हैं
                 सहकारी विकास के नवीन प्रयास
* राजस्थान सहकारी सोसायटी नियम 2003 में संशोधन किए गए
 व्याख्या - इसमें सहकारी संस्थाओं के संचालक मंडल में चुनाव के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है साथ ही अधिकारियों व कर्मचारियों की भर्ती के लिए सहकारी भर्ती बोर्ड के गठन का प्रावधान किया गया है
राज सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना प्रारंभ की गई
व्याख्या -इस योजना के तहत राजस्थान के सहकारी साख क्षेत्र के किसान क्रेडिट कार्ड धारक सदस्यों के लिए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी और सिर्फ बैंक के मध्य समझौता अनुसार ऋणी सदस्य का ₹27 की प्रीमियम राशि पर वह अन्य का ₹54 की प्रीमियम राशि पर ₹500000 का बीमा किया जाता है
सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजना कब लागू की गई
व्याख्या -इस योजना के तहत राजस्थान के सहकारी साख क्षेत्र के किसान क्रेडिट कार्ड धारक सदस्यों के लिए एसबीआई इंश्योरेंस कंपनी एवं शीर्ष बैंक के मध्य समझौता अनुसार ऋणी सदस्य का 6 पॉइंट 50 रुपए प्रति हजार प्रति वर्ष प्रीमियम राशि पर 1000000 रूपए तक का बीमा किया जाता है
राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2016 लागू किया गया
व्याख्या- इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार है
 1. पंचायती राज चुनाव की तर्ज पर सहकारी संस्थाओं के चुनाव में शैक्षणिक योग्यता लागू की गई है इसके द्वारा राजस्थान भारत का पहला प्रदेश बना है जिसकी सहकारी समितियों के चुनाव में शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान किया गया है
2. कार्मिकों की भर्ती के लिए बोर्ड के गठन का प्रावधान राजस्थान देश का पहला राज्य होगा जिसकी सहकारी समितियों कार्मिकों की भर्ती के लिए भर्ती बोर्ड का गठन करेगी जिसके द्वारा मुख्य सहकारी समितियों के कार्मिकों की भर्ती की जाएगी
3. सोसायटी यों को स्वायत्तता प्रदान की गई है पहले सभी सहकारी सोसायटी ओं के निर्वाचन राज्य सहकारी निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा करवाए जाने के प्रावधान थे जिन के स्थान पर अब केवल नियमों में आधारित वर्ग की सहकारी सोसायटी ओं के निर्वाचन ही राज्य सहकारी निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा कराए जाएंगे सेन सोसायटी ओं अपनी आम सभा में निर्वाचन कराने के लिए स्वतंत्र होगी
4. ऑडिट अनिवार्य होगी सहकारी सोसायटी ओं को पूर्व की भांति अपना ऑडिट्स में कराने की स्वायत्तता यथावत रहेगी किंतु यदि किसी सोसायटी द्वारा निर्धारित काल अवधि के भीतर अंकित शक की नियुक्ति नहीं की जाती है तो ऐसी स्थिति में रजिस्ट्रार अपने स्तर पर सोसाइटी के अंकेक्षण हेतु अनेक की नियुक्ति कर सकेगा
5.  अब संचालक मंडल का कोई भी सदस्य लगातार दो कार्यालय से अधिक सदस्य नहीं बन सकेगा लगातार दो कार्यकाल के पश्चात संचालक मंडल की सदस्यता के लिए एक कार्यकाल का अंतराल आवश्यक होगा इससे सहकारी समितियों में गिने-चुने प्रभावशाली लोगों का ही एक आदित्य रहने की पर्वती समाप्त होगी
6. राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्ति संसद का कोई सदस्य या राज्य विधानमंडल का कोई सदस्य या किसी जिला परिषद का प्रमुख या उप प्रमुख या किसी पंचायत समिति का प्रधान या उप प्रधान या किसी ग्राम पंचायत का सरपंच व उपसरपंच या किसी नगर पालिका अथवा स्थानीय निकाय का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष किसी सहकारी सोसायटी का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष नहीं बन सकेगा इससे सहकारी सोसायटी ओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्ति मिल सकेगी
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में पहला सहकारी मिनरल वाटर प्लांट सूरतगढ़ श्री गंगानगर कि 24 पीडी ग्राम सेवा सहकारी समिति ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में पहला सहकार्य मिनरल वाटर प्लांट स्थापित किया है
* राजस्थान में कृषकों को साथ उपलब्ध कराने हेतु व्यवस्था आगरा अनुसार अपनाई गई है
                          सहकारी साख
(अ)  अल्पकालीन व मध्यकालीन साख( त्रिस्तरीय व्यवस्था)
(1) शीर्ष स्तर पर राजस्थान राज्य सहकारी बैंक जयपुर
(2) जिला स्तर पर केंद्रीय सहकारी बैंक (31 बैंक)
(3) प्राथमिक स्तर पर प्राथमिक कृषि सहकारी साख समितियां
(ब)  दीर्घकालीन साख ( द्वि स्तरीय व्यवस्था)
(1) शीर्ष स्तर पर राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक
(2) प्राथमिकी या जिला स्तर पर प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक (कुल 36 बैंक)