मीराबाई जीवन परिचय

मेड़ता के राठौड़ शासक राव रत्नसिंह की पुरी मीरा का जन्म 1498 ई . में मेड़ता पास ' बाजीली ' गाँव में हुआ तथा लालन - पालन कुड़की गाँव में हुआ । इनका पालन ऐषण इनके दादा राव दूदा ने किया । 1516 ई . में मीरा का विवाह मेवाड़ के महाराणा के ज्येष्ठ पुर भोजराज के साथ हुआ । भोजराज को आकस्मिक मृत्यु ने मीरा के जीवन को एकाकी व संघर्षमय बना दिया और वह संत सेवा व कृष्ण भक्ति में सीन हो गई । सांगा की मृत्यु के बाद मेवाड़ के शासक विक्रमादित्य ने मीरा को कर पहुँचाए । फलतः वह चित्तौड़ का परित्याग कर वृन्दावन चली गई और वहीं चैतन्य महाप्रभु के शिष्य रूपगोस्वामी से दीक्षा ली । सगुण भक्ति संत मीरा में कृष्ण की भक्ति का बीजारोपण तो बचपन में हो हो गया था । मगर पति की मृत्यु के बाद इन्होंने तत्कालीन समाज को सभी रूड़ियों का त्याग कर अपने को संत संगति व कृष्ण भक्ति में निमग्न कर लिया और अंततः कृष्ण को ही अपना सर्वस्व मान लिया । ' माये तो गिरधर गोपाल , दूसरो न कोई । ' मीरा की भक्ति माधुर्य भव की थी । इनकी भक्ति की मुख्य विशेषता यह थी कि उनहोंने ज्ञान से अधिक भावना व ब्रद्धा को महत्व दिया । मीरा के अनुसार गायन , नृत्य और कृष्ण स्मरण ही भक्ति का सरत मार्ग है । मीरा ने भकित , वात्सल्य और भूगार की विगी से भजनों को प्रवाह व प्रखर रूप दिया । इन्होंने सामान्य बोलचाल की भाषा में अपने विचारों को प्रकट किया । राजस्थानी , ब्रज , गुजराती और पंजाबी भाषा में इनके द्वारा रचित पद मिलते हैं । ' सत्याभामा जी नू स्मणो ' , ' गीत गोविन्द को टीका ' , ' राग गोविन्द ' , ' मीरा री गरीबी ' , ' रुकमणी मंगल ' आदि मीरा द्वारा रचित प्रमुख रचनाएँ हैं । मीरा अपने प्रियतम कृष्ण को खोजती हुई अंतत : द्वारका चली गई । माना जाता कि गुजरात के डाकोर नामक स्थान पर स्थित रणछोड़ मंदिर में कृष्णभक्ति करते र मीरा कृष्ण में विलीन हो गई ।

संत दादूदयाल दादू पंथ

संत दादूदयाल दादू पंथ के प्रवर्तक दादू दयाल का जन्म अहमदाबाद में 1544 ई . में इनका लालन - पालन लोदीराम ब्राह्मण ने किया । संत ब्रह्मानन्द दादू के गुरु ई . में इन्होंने सांभर में धुनियाँ का कार्य शुरू किया और यहीं पर सर्वप्रथम जनसाधारण को अपने उपदेश दिए । इन्होंने हिन्दू - मुसलमानों के धार्मिक अंधति का खण्डन किया , जिससे सांभर के काजी द्वारा इन्हें प्रताड़ित भी किया गया । सीन इन्होंने अपनी विचारधारा को नहीं छोड़ा । सांभर में इनके काफी शिष्य हो गए थे । यहीं से दादूपंथ का आरंभ माना जाता है । सांभर में ही 1575 ई . में इनके पहले ही गरीबदास का जन्म हुआ । बाद में एक पुत्र मिस्किनदास और दो पुत्रियां शोभाकरी और रूपकंवरी और हुई । 1585 ई . में इन्होंने फतेहपुर सीकरी में मुगल सम्राट अाय से भेंट की । तत्पश्चात् आमेर , जयपुर , मारवाड़ आदि स्थानों में भ्रमण करते हुए कहा अपने विचारों का प्रचार किया । अंत में ये ' नरायणा ' आ गए और यहीं 160313 इनका देहांत हो गया । यही इस पंथ का प्रमुख पीठस्थल है । दादू ने ब्रह्म , जीव , जगत और मोक्ष पर अपने उपदेश सरल मित्र हिन्दी ( सधुक्याड़ी में दिए । दादू के 152 प्रधान शिष्य थे , जिसमें से 100 शिष्य एकान्तवासी थे , किंग शिष्यों ने स्थान - स्थान पर दादारों की स्थापना की । इन्हें दादू पंथ का बावन म्यान भी कहा जाता है । ' दादूजी की वाणी ' तथा ' दादरा दहा ' नामक ग्रंथों में दादू के उपदेश और विचार संगृहीत हैं । दादू कबीर की ही तरह सुधारवादी , आचरण और मेह मूल्यों को मानने वाले , परमतत्व की खोज की ओर उन्मुख थे । इसलिए इन्हें राजस्थान का कबीर ' भी कहा जाता है । दादू ने परब्रह्म को आदि गुरु माना है और राम व मला में भेद नहीं माना है । दाद ने कर्मकाण्ड , जातिप्रथा , मूर्तिपूजा , रूढ़िवादिता आदि । घोर विरोध किया । गरीबदास , मिस्किनदास , सुन्दरदास , बखनाजी , रजन , माधोधन दादू के प्रसिद्ध शिण थे ।

मारवाड़ प्रजामण्डल

मारवाड़ प्रजामण्डल मारवाड में राजनीतिक चेतना जागृत करने की शुरुआत 1920 ई . में स्थापित ने की । इसके सदस्यों ने खादी प्रचार और विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार मे कार्यक्रम चलाये । मारवाड़ सेवा संघ ने मादा पशुओं की निकासी के विरुद्ध आंदोलन । जलाया । फलतः महाराजा को मादा पशुओं की निकासी पर पुनः प्रतिबंध लगाना पड़ा । 1927 ई . में जयनारायण व्यास ने ' मारवाड़ हितकारिणी सभा ' के बैनर तले राज्य में उत्तरदायी शासन स्थापित करने की माँग की तथा राज्य द्वारा समाचार पत्रों पर लगाये गये प्रतिबंध एवं जागीरदारों द्वारा किसानों पर किये जा रहे अत्याचारों की आलोचना की । फलत : 1929 ई . में व्यास और उनके सहयोगियों द्वारा अखिल भारतीय देशी राज्य
राज्य ने इन पुस्तकों कार्यकर्ताओं जयनारायण लेक परिवाना व्यास के शासन । ' लोक परिषद के जोधपुर में बुलाये जाने वाले अधिव मारवाड़ की अवस्था ' एवं ' पापावापा अत : जपनारायण व्यास पुस्तिकाएं लिखकर मारवाड़ के शासन की कट आलोचना की । राज्य नइन पर पर प्रतिबंध लगा दिया और मारवाड़ हितकारिणी सभा के प्रमुख कार्यकर्ताओंजयः व्यास , आनन्दराज सुराणा और भवरलाल सर्राफ को गिरफ्तार करके जेल भेजा मार्च , 1931 के गांधी - इविन समझौते के फलस्वरूप ये नेता जेल से रिहा , 10 मई , 1931 को जयनारायण व्यास ने ' मारवाड़ यूथ लीग ' की स्थापना इसके सदस्यों ने यादी प्रचार , विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार व शराब की दक धरना दिया तथा सरकार से उत्तरदायी शासन , नागरिक अधिकार देने की मांग जेल भेज दिया । जेल से रिहा हुए । लीग ' की स्थापना की । देने की मांग के साथ की । 24 - 25 नवम्बर को य लोक परिषद् का अधिवेशन साथ ताग - बाग एवं बेगार पर रोक लगाने की भी माग का । 24 - 25 नवर पादकरण शारदा की अध्यक्षता में पुष्कर में मारवाड़ राज्य लोक परिषद्का अनि हुआ , जिसमें कस्तूरबा , काका कालेलकर और मणिलाल कोठारी जैसे राष्ट्रीय ने भी शिरकत की । अधिवेशन में जागीरदारी अत्याचारों और राज्य की दमन नीति कर आलोचना की गई तथा उत्तरदायी शासन की स्थापना एवं नागरिक अधिकारों के में प्रस्ताव पास किए गए । 5 मार्च , 1932 को राज्य सरकार ने ' मारवाड़ दरबार पब्लिक सेफ्टी अध्यादेश जारी कर सभी प्रकार के आंदोलनों पर प्रतिबंध लगा दिया । 1934 ई . में छगनराज चौपासनी वाला , अभयमल मेहता एवं भंवरलाल साफ ने ' मारवाड़ प्रजामण्डल ' की स्थापना की और मारवाड़ में उत्तरदायी शासन की स्थापन एवं नागरिक अधिकारों की रक्षा अपना लक्ष्य घोषित किया । राज्य ने भाषण और सभ पर प्रतिबंध लगाते हुए जयनारायण व्यास को राज्य से निष्कासित कर दिया । ' कृष्ण ' मामले को लेकर प्रजामण्डल ने विरोध सभाओं का आयोजन किया । फलतः सरकार ने अगस्त , 1936 में प्रजामण्डल को अवैध घोषित कर दिया । जुलाई , 1936 में प्रजामण्डत ने राज्य द्वारा स्कूलों व कॉलेजों की फीस वृद्धि के विरोध में आंदोलन चलाया । सरकार ने फीस वृद्धि को निरस्त नहीं किया , मगर इससे जनता में जागरूकता बढ़ी । दिसम्बर 1937 में ' मारवाड़ की अवस्था ' नामक पुस्तक रखने के आरोप में छगनराज चौपाल याला और राज्य शासन के विरुद्ध प्रचार करने के अपराध में पुरुषोत्तम प्रसाद नया प्रजामण्डल को लोकप्रियता मिली । बंदी बनाकर कठोर कारावास की सजा दी गई । सरकार के इन दमनकारी कर हरिपुरा अधिवेश के पर मारवाड़ लोक परिषद - फरवरी , 1938 में कांग्रेस के हरिपुरा अधिव राज्य में उत्तरदायी शासन की स्थापना की माँग ने जोर पकड़ा । प्रजामण्डल लगा होने से मई , 1938 में रणछोड़दास गट्टानी की अध्यक्षता में ' मारवाद की स्थापना की गई । निर्वासित जयनारायण व्यास को इसका मुख्य उद गया । लोक परिषद् ने जागीरदारी प्रथा का विरोध करते हुए उत्तरदाया करने की मांग की । 1938 ई . में श्रीमती विजयलक्ष्मी पंडित और सु " जोधपुर आने से जनआंदोलन को बल मिला । 1939 ई . में जयनारायण व्यार प्रजामण्डल पर प्रतिया

जयपुर प्रजामण्डल

जयपुर प्रजामण्डल राज्य में जन - जागृति का प्रथम सुव्यवस्थित प्रयास श्री अर्जुनलाल सेठी या । तत्पश्चात् जयपुर हितकारिणी सभा , आर्य समाज आदि ने भी युवाओं में राष्ट्रीय भावना उत्पन्न की । 1922 ई . में हिन्दी को राजभाषा बनाने के लिए ठाकुर कल्याणसिंह श्यामलाल वर्मा ने , चरखा संघ के माध्यम से जमनालाल बजाज ने भी जनजागति पैदा करने का प्रयास किया । सितम्बर , 1927 में जयपुर में भ्रष्ट शासन व नये करों के विरुद्ध प्रदर्शन हुआ । शासन द्वारा शक्ति का प्रयोग करने के बावजूद जनता की जागरूकता का दमन न हो सका । राज्य की दमन नीति का विरोध करने एवं नागरिक अधिकारों की स्थापना के लिए 1931 ई . में श्री कपूरचन्द पाटनी ने ' जयपुर प्रजामण्डल ' की स्थापना की । मगर उन्हें आवश्यक सहयोग नहीं मिला । 1937 ई . में जमनालाल बजाजी , केसों में महामण्डल का पुनर्गठन किया गया जिसका अध्यक्ष उपाध्यक्ष चिरंजीलाल मित्र , सचिव होरालाल शास्त्री और संयम , पाटनी को बनाया गया । जयपुर प्रजामण्डल ने महाराजा की छाछाया में को स्थापर नागरिक अधिकारों को स्थापना को अपना ले प्रमण्डल ने पाय सभा की स्थापना , अभिव्यक्ति की स्वतंत्र अकालयस्त क्षेत्रों में तगान वसूली न किये जाने की भी मांग की । संयुक्त सचिव कपूरचर जलाया में उत्तरदायी शाय पदा उद्देश्य घोषित किर जयपुर में जमनालाल बा संबंध में प्रस्ताव पारित अक्ति की स्वतंत्रता , लाग - बाग हारे ने की भी मांग की । 1 - 9 मई , 1935 को प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन जयपुर में जब की अध्यक्षता में हुआ , जिसमें प्रजामण्डल के उपर्युक्त उद्देश्यों के संबंध में य में निर्वासित व्यक्तियों का निवासन तुरंत रद करने की मांग की । जमण्डल की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने 30 मई 100 र नियम प्रसारित करके किसी भी गैर पंजीकृत संस्था द्वारा सभा - सम्मेलन व उसका सदस्य बनना अवैध घोषित कर दिया । सरकार ने राज्य कर्मचारियों व उससे अनि के राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया तथा सभा बजलसों पर भी रोक लगा दी । 16 दिसम्बर , 1938 को जमनालाल बजाज के जयपर प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया । 11 फरवरी , 1939 को बजाज ने राज्याज्ञा का उल्लंघन का उपपुर में प्रवेश किया । फलतः उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया । उसी रात्रि को होगतात शाम्बी , चिरंजीलाल , हरिशचन्द्र , कपूरचन्द्र पाटनी और हंस डी . राय को गिरफ्तार कर लिया गया । लेकिन प्रजामण्डल का सत्याग्रह समाप्त होने की जगह गति कर गया हजारों की संख्या में पुरुषों और महिलाओं ने सत्याग्रह में भाग लिया , गिरफ्तार हुए और पुलिस के अत्याचार सहे । 18 मार्च , 1939 को गांधीजी की सता पर सत्याग्रह स्थगित कर दिया गया । अतः राज्य सरकार ने अगस्त , 1939 को सभा सपाहियों को बेलों से मुक्त कर प्रजामण्डल को मान्यता प्रदान कर दी । 25 मई , 1949 को प्रजामण्डल के अधिवेशन में जमनालाल बजाज ने उत्तरदा शासन स्थापित करने की मांग को पुनः दोहराया तथा शेखावाटी के किसान सखावाटी के किसान आंदोलन मण्डल के तीसरे अधिवेशन में दाइसी मध्य प्रजामण्डल कार्यकारिणी से मार साल दल ' का गठन कर लिया । आ . को समर्थन दिया । नवम्बर , 1941 में सीकर में प्रजामण्डल के तीसरे आप उत्तरदायी शासन की मांग पुनः उठाई गई । इसी मध्य प्रजामण्डल कार्यका होने पर विरंजीलाल ने ' प्रजामण्डल प्रगतिशील दल ' का गठन प्रजामण्डल कुछ कमजोर हुआ । अत : सरकार ने प्रजामण्डल की मागा दी । फरवरी , 1942 में श्री बजाज के देहांत से भी प्रजामण्डल का अगस्त , 1942 के ' भारत होने आंदोलन ' के दौरान प्रजामण्डल उत्तरदायी शासन स्थापित करने की मांग की । जयपुर राज्य के प्रधानमंत्री ने हीरालाल शास्त्री को पत्र लिखकर राज्य में शीघ्र ही उत्तरदायी शासन का आश्वासन दिया । अत : प्रजामण्डल ने आंदोलन नहीं छेड़ा । बाम रामकरण जोशी , दौलतमल भण्डारी और हंस दी . - मण्डल की मांगों की उपेक्षा कर प्रजामण्डल को धक्का लगा । रान प्रजामण्डल ने महाराजा के व के प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माईत दायी शासन स्थापित कर छड़ा ।

मेवाड़ प्रजामण्डल

 मेवाड़ प्रजामण्डल लिया किसान आन्दोलन ने किसानों के साथ - साथ मेवाड़ राज्य की सम्पूर्ण जागति उत्पन्न कर दी । जनता नागरिक अधिकारों एवं शोषण के खिलाफ कि होकर राज्य की नीतियों का विरोध करने लगी । 1932 से 1938 ई . तक कार्य एवं अनियमित करों की वसूली के विरोध में उदयपुर में प्रदर्शन हुए . मगर शेग्य नेतृत्व के अभाव में ये प्रदर्शन अपने उद्देश्य की परिणति तक न पहुँच सके । राज्य दारा विरोध को शक्ति से दबाने के बावजूद लोग अभिव्यक्ति एवं सभा - सम्मेलन करने की आजादी देने की मांग पर अड़े रहे । कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में रियासतों के राजनैतिक संगठनों को समर्थन देने का प्रस्ताव पारित होते ही माणिक्यलाल वर्मा , ओ भीलों के मध्य रचनात्मक कार्य में मलान थे , ने मेवाड राज्य का दौरा कर राजनैतिक संगठनों की पृष्ठभूमि तैयार की ।
उन्होंने उदयपुर पहुंच कर अपने साथियों से विचार - 14 . को बलवन्तसिंह मेहता के निवास पर मेवाड़ प्रजामण्डल ' की स्थापना मेहता को प्रजामण्डल का अध्यक्ष , भूरलाल बया को उपाध्यक्ष और महामंत्री बनाये गये । तीन दिन में उदयपुर शहर में प्रजामण्डल बनने से मेवाड़ सरकार चिन्तित हो गई और उसने माणिक्य लाल की स्थापना की स्वीकृति लेने का आदेश दिया । लेकिन वर्मा ने दो फलतः । । मई , 1938 को राज्य ने प्रजामण्डल को गैरकानूनी घोषित कर भाषणों और समाचार पत्रों पर प्रतिबन्ध लगा दिया तथा माणिक्य लाल की व्यास को मेवाड़ छोड़ने के आदेश दिए । अवैध सपना की । बलब और माणिक्यलाल मण्डल के दो हजार से लाल वर्मा को प्रदान मी ने इससे इन्कार कर दिया घोषित करते हुए सभः लाल वर्मा और रमेशवर भगवा 1944 आदेश प्राप्त कर अ की अ 31 दि अध्यक्ष माणिक्य लाल वर्मा वर्धा पहुंचे और वहां से गांधीजी का आदेश पालन में प्रजामण्डल का अस्थायी कार्यालय स्थापित किया । अजमेर से वर्मा ने वर्तमान शासन ' नामक पुस्तिका प्रकाशित की जिसमें मेवाड़ राज्य के शासन आलोचना की गई । सरकार ने प्रजामण्डल की आवाज को दबाने के उद्देश्य से प्रेमनार माथुर को राज्य से निष्कासित कर दिया । 30 सितम्बर को प्रजामण्डल के उपमा भूरेलाल बया को गिरफ्तार कर लिया । फलतः प्रजामण्डल ने विजयादशमी से सत्याना शुरू करने की घोषणा की , मगर इससे पूर्व राज्य सरकार ने बलवन्त सिंह मेहता । रमेशचन्द्र व्यास सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया और कई मेवा से निष्कासित कर दिये गए । राज्य सरकार की इस दमनात्मक कार्यवाही के विशेष में उदयपुर , भीलवाड़ा , चित्तौड़ , जहाजपुर , नाथद्वारा आदि स्थानों पर सभाएं हुई । नाथदरा । में महिलाओं ने भी आन्दोलन में भाग लिया और जेल गईं । 2 फरवरी , 1939 को माणिक्य लाल वर्मा को देवली से गिरफ्तार कर अमानुषिक यातनाएं दी गई । उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर दो वर्ष की सजा दी गदार में स्वास्थ्य खराब होने पर 8 जनवरी , 1940 को उन्हें मक्त कर दिया गया । की सलाह पर प्रजामण्डल ने सत्याग्रह स्थगित कर दिया । 22 फरवरी , 1947 में उत्त मेवाड़ कार्यका से युक्त नहीं वि जिसे 2 सरकार कोठारी चुनाव । महाराणा गोली से प्रश्न ह 1 22 फरवरी , 1941 को राज्य जामण्डल ने नागरिक अधिका कार्य जारी रखा । 25 - 3 माणिक्य लाल वर्मा किया । अधिवेशन में गन्न जयपुर ने किया न पूरे राज्य में शयर का कम करने के लि पाली व्यवस्थापिका भावना एवं श्या सरकार ने प्रजामण्डल पर लगा प्रतिबंध हय दिया । प्रजामण्डल ने नागार एवं उत्तरदायी शासन को स्थापना के लिये जनजागृति का कार्य जारी नवम्बर , 1941 को मेवाड़ प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन माणिक्या सभापतित्व में हुआ , जिसका उद्घाटन आचार्य कपलानी ने किया । आप में उत्तरदायी शासन स्थापित करने की मांग की गई । प्रजामण्डल ने पूर खोलकर जनजागृति का प्रयास किया । प्रजामण्डल के प्रभाव को कम मेवाड़ सरकार ने जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों के बहमत वाली स्थापित करने की घोषणा की । अगस्त , 1942 में ' भारत छोड़ो ' आन्दोलन के दौरान प्रजामण्डल का साथ छोड़ो ' नारा दिया ।

मेहरानगढ़ का किला

मेहरानगढ़ का किला , जोधपुर मेहरानगढ़ के किले का निर्माता जोधपुर नगर का संस्थापक 1489 ई . ) था । राव जोधा ने 13 मई , 1459 को चिड़ियाट्रक ना चिड़ियानाथ के नाम पर , जिनका स्थान आज भी किले के पीछे विता की नींव रखी । ऐसी मान्यता है कि किले की नीव में राजिया नामक दफन किया गया । मयूराकृति का होने के कारण जोधपुर के किले को भी कहा जाता है राव जोधा ने इस किले के चारों ओर एक नगर बसायी जो उनके नाम पर जोधपुर कहलाया । राजस्थान के पर्वतीय दुर्गों में सबसे किला अपनी विशालता के कारण ' मेहरानगढ़ ' कहलाया । के पीछे विद्यमान है ) पर किन या नामक व्यक्ति को जित के किले को ' मयूरध्वज गव ' और एक नगर बसाया ( 14598 । तीय दर्गों में सबसे प्रमुख , यह माधोप बीच और व के संब किला जमीन दुर्गम मेहरानगढ़ किला भूमितल से लगभग 400 फीट ऊँचा है । किले के चारों को मुद परकोटा है जो लगभग 20 फीट से 120 फीट तक ऊँचा और 12 से 20 फीट तक चौड़ा है । किले की लम्बाई 500 और चौड़ाई 250 गज है । इसकी प्राचीर में विशाल बुर्जे बनी हुई हैं । मेहरानगढ़ के दो बाह्य प्रवेशद्वार हैं - उत्तर - पूर्व में जयपोल तथा दक्षिण - पश्चिम में फतेहपोल । ध्रुवपोल , सूरजपोल , इमरतपोल , भैरोंपोल आदि म प्रवेश द्वार हैं । 1544 ई . में इस किले पर शेरशाह सूरी ने अधिकार कर लिया था । लेकिन 1545 ई . में मालदेव ने पुनः इसे अपने आधिपत्य में ले लिया । 1565 ई . में मुगल सूबेदार हसन कुली खाँ ने चन्द्रसेन का आधिपत्य समाप्त कर इस पर मुगल आधिपत्य से स्थापना की । मुगल आधिपत्य स्वीकार करने पर मोटा राजा उदयसिंह को 1582 जागीर के रूप में दे दिया गया । 1678 ई . में औरंगजेब ने इसे मुगल राज्य में मिला 1707 ई . में औरंगजेब की मृत्यु होने पर अजीतसिंह ने मुगल सूबेदार जफर कुता से इसे छीन लिया । तब से ये राठौड़े का निवास स्थान रहा है । ब्रिटिश सा रूडयार्ड किपलिंग ने एक लंबा समय इस किले में बिताया । उसने इ " देवताओं परियों और फरिश्तों द्वारा निर्मित माना है । " लाल पत्थरा सनगद स्थापत्य कला की दृष्टि से बेजोड है । महाराजा सूरसिह मातामहत सुनहरी अलंकरण के लिए प्रसिद्ध है । इसकी छत व दाव महाराजा तस्तसिंह की देन है । अभयसिंह द्वारा निर्मित फूलमा लिए प्रसिद्ध है । तख्त विलास , अजीत विलास , उम्मद आदि का भीतरी वैभव दर्शनीय है । महलों में नक्काशी , मेहराबों , झ ॥ हरत में डालने वाली है । चोखेलाव महल , विचला महल , महा घाटी में नीचे है । हो गया बताया । उसने इस किले को लाल पत्थरों से निर्मित सूरसिंह द्वारा मिति तव दीवारों पर सोने का पौलिक का कार्य महाराजा तरतसिंह को दन हा पर बारीक खुद के लिए प्रसिद्ध है । तखत विलास , में रणथा उसने का है । ती , मेहराबों , झरोखों और

भरतपुर प्रजामण्डल

भरतपुर प्रजामण्डल भरतपुर में जन चेतना जागृति का श्रेय ' आर्य समाज ' को है । 1920 ई . तक भरतपुर , डीग , कुम्हेर , भुसावर , नगर , बयाना , वल्लभगढ़ इत्यादि में आर्य समाज की शाखाओं और मंदिरों की स्थापना हो चुकी थी । जगन्नाथ अधिकारी ने भी ' हिन्दी साहित्य समिति 1012 ई . और ' वैभव ' नामक पत्र के द्वारा जनजागृति का कार्य किया । फलतः उसे दोह के आरोप में जेल जाना पड़ा । किसानों की मांगों को लेकर देशराज ने 1924 107 ई . तक अनेक सभाएँ की और किसानों की मांगों से सरकार को अवगत कराया , मगर सरकार उदासीन बनी रही । 1927 ई . में महाराजा कृष्णसिंह द्वारा उत्तरदायी शासन स्थापित करने की घोषणा करने पर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पदच्युत करके डंकन मैकेन्जी को शासन संबंधी अधिकार साँप दिये । मैकेन्जी ने सभाओं , जुलूसों और नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिया । मैकेन्जी की नीतियों के विरोध में नवम्बर , 1928 में ' भरतपुर राज्य प्रजा संघ ' की स्थापना की गई । गोपीलाल यादव को इसका अध्यक्ष और देशराज को सचिव बनाया गया । प्रजा संघ ने राजपूताना प्रांतीय देशी राज्य परिषद् का अधिवेश भरतपुर में करवाने की योजना बनाई तो प्रजा संघ के सचिव देशराज को गिरफ्तार कर लिया गया । जनता ने दीवान को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया । 1930 - 31 ई . में भरतपुर । में छात्रों ने स्वतंत्रता दिवस मनाया । सरकार ने पुलिस कार्यवाही द्वारा आंदोलन को दबाने का प्रयास किया । पं . नेहरू की प्रेरणा से 1937 ई . में भरतपुर में कांग्रेस मण्डल की स्थापना हुई । माच , 1938 में रेवाड़ी में ' भरतपुर राज्य प्रजामण्डल ' की स्थापना हुई , गोपीलाल यादव प्रजामण्डल का अध्यक्ष , ठाकर देशराज व रेवतीशरण उपाध्याय को उपाध्यक्ष बनाया गया । प्रजामण्डल ने पंजीकरण के लिए सरकार को आवेदन दिया , मगर सरकार ने माकरण से इनकार करते हुए इसे अवैध घोषित कर दिया । प्रजामण्डल ने भाषण व पर प्रतिबंध हटाने व उत्तरदायी शासन स्थापित करने की मांग करते हुए 21 अप्रैल , सत्याग्रह शुरू कर दिया । प्रजामण्डल ने किसानों को लगान नहीं चुकाने की का । प्रजामण्डल के नेताओं की गिरफ्तारियों व दमन के बावजूद जब आंदोलन वा राज्य ने 23 दिसम्बर , 1940 को प्रजामण्डल से समझौता कर लिया । वक बदियों को रिहा करते हए प्रजामण्डल का प्रजा परिषद् के नाम से या गया तथा भाषण , लेखन और सभाओं पर से प्रतिबंध हटा दिया । बर , 1940 से । जनवरी , 1941 तक प्रजा परिषद् का प्रथम राजनीतिक मजयनारायण व्यास की अध्यक्षता में हुआ । सम्मेलन में उत्तरदायी ना की मांग दोहराई गई128 से 30 दिसम्बर , 1941 काम एकदमा था राज्य ना पड़ा । जैसलमेर जा परिषद दिया गया दिया गया । गरमल गोपा 1939 को सत्याग्रह शुरू कर दिया में ' जैसलमेर भी अपील की । प्रजाम व गोपाको वक अत्याचार हिस का संचार कई कार्यकारी सलमेर में एक अक्र बर , 100 जिस पर पुलिस सभी राजनीतिक दिया पंजीकरण किया गया तथा 30 दिसम्बर , 1940 से । सध्यालेन भातपुर में जप शासन स्थापना काम

संस्कृति , परम्परा एवं विरासत

राजस्थान का इतिहास , संस्कृति , परम्परा एवं विरासत लिया । भंवरलाल कवि से तथा कल्याणदास करौली प्रजामण्डल करौली में रचनात्मक कार्यों द्वारा जनजागृति का शुरुआत ठाकुर पूर्णसिंह मदनसिंह ने की । मदनसिंह ने सुअर मारने पर प्रतिबंध हटाने , प्रशासन प्रयोग व बेगार समाप्ति की मांग को लेकर अपनी पत्नी के साथ अनशन कि के दबाव के कारण शासन ने इनकी मांगों को स्वीकार कर लिया । ने खादी प्रचार द्वारा , चिरंजीलाल ने हरिजनोद्धार के माध्यम से तथा कल रामगोपाल ने बेगार विरोधी आंदोलन एवं समाचार पत्रों के माध्यम से करौली में चेतना और जन - जागृति पैदा करने का कार्य किया । 1938 ई . में त्रिलोकचन्द माथुर ने अपने साथियों के साथ करौली प्रजाम स्थापना की । प्रजामण्डल ने जनता की सामाजिक , राजनीतिक और आर्थिक दशा का लक्ष्य रखा । प्रारंभ में इसने उत्तरदायी शासन की मांग भी नहीं की । फिर भी सरकार द्वारा प्रजामण्डल कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसाकर परेशान किया गया अप्रैल , 1939 में करौली में प्रजामण्डल के अधिवेशन में प्रशासनिक सुधारों की मांग की गई । प्रजामण्डल ने बंजर भूमि पर लगान नहीं लेने , बेगार समाप्त करने , किसने को ऋण देने के लिए सरकारी समितियों की स्थापना करने तथा स्थानीय स्वशासन स्थापित करने की भी मांग की । राज्य ने प्रजामण्डल की मांगों पर ध्यान देने के बजाय इससे जुड़े लोगों को उत्पीड़ित किया । ' भारत छोड़ो ' आंदोलन के दौरान प्रजामण्डल कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनों और भाषा के द्वारा आंदोलन को गतिशील रखा । सरकार ने प्रजामण्डल के कई कार्यकतोआ के बना लिया । नवम्बर , 1946 में राजपूताना के राज्यों के राजनीतिक कार्यकर्ताओं का सम्मेलन करौली में हुआ , जिसमें पहली बार करौली में उत्तरदायी शासन स्थ मांग की गई । प्रजामण्डल ने राशन पद्धति की बुराइयों और दमनकारी का में सभाएं की और जुलूस निकाले । फलतः राज्य ने जुलाई , 1947 में से के लिए एक समिति नियुक्त की , लेकिन इसमें प्रजामण्डल के ए . र दमनकारी कानूनों के विरोध तुलाई , 1947 में संवैधानिक सुधार जामण्डल के एक भी सदस्य के : को करौली के ' मन उत्तन सम्मिलित नहीं करने से आंदोलन चलता रहा । 18 मार्च , 19 संघ ' में विलय तक उत्तरदायी शासन स्थापित करने की दिशा म करने की दिशा में कदम नहीं उठाया चार सुधारिणी स घौलपुर प्रजामण्डल 11910 ई . में ज्वाला प्रसाद और यमुना प्रसाद ने और 1911 ई . में ' आर्य समाज ' के माध्यम से जन चेतना 1918 ई . में स्वामी श्रद्धानंद के नेतृत्व में आर्य समाज ने फलतः आर्य समाज के कई कार्यता माध्यम से जन चेतना जागृत करने के समाज ने स्वशासन आंदोलन

जयपुर प्रजामण्डल

जयपुर प्रजामण्डल जयपर राज्य में जन - जागृति का प्रथम सुव्यवस्थित प्रयास श्री अर्जुनलाल सेठी किया । तत्पश्चात् जयपुर हितकारिणी सभा , आर्य समाज आदि ने भी युवाओं में राष्ट्रीय बना उत्पन्न की । 1922 ई . में हिन्दी को राजभाषा बनाने के लिए ठाकुर कल्याणसिंह व श्यामलाल वर्मा ने , चरखा संघ के माध्यम से जमनालाल बजाज ने भी जनजागृति पैदा करने का प्रयास किया । सितम्बर , 1927 में जयपुर में भ्रष्ट शासन व नये करों के विरुद्ध प्रदर्शन हुआ । शासन द्वारा शक्ति का प्रयोग करने के बावजूद जनता की जागरूकता का दमन न हो सका । राज्य की दमन नीति का विरोध करने एवं नागरिक अधिकारों की स्थापना के लिए 1931 ई . में श्री कपूरचन्द पाटनी ने ' जयपुर प्रजामण्डल ' की स्थापना की । मगर उन्हेंआवश्यक सहयोग नहीं मिला । 19375 . 4 ॥ के प्रयासों से प्रजामण्डल का पुनर्गठन किया गया जिसका अध्यक्ष उपाध्यक्ष चिरंजीलाल मिा , सचिव हीरालाल शास्था और संयुक्त राम पानी को बनाया गया । जयपुर प्रजामण्डल ने महाराजा की छाछाया में की की स्थापना एवं नागरिक अधिकारों की स्थापना को अपना उदेश , प्रजामण्डल ने धारा सभा की स्थापना , अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता , लाग : अकालगस्त क्षेत्रों में लगान वसूली न किये जाने की भी मांग की । 8 - 9 मई , 1918 को प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन जयपुर में जमनालाल ने अ लाया में उत्तरदायी शासन ना उद्देश्य घोषित किया । तंत्रता , लाग - बाग हटाने व की चलान करने करें , आंदो सरका विरोध को अध्यक्षता में हुआ , जिसमें प्रजामण्डल के उपर्युक्त उद्देश्यों के संबंध में प्रस्ताव पारि करते हुए राज्य से निर्वासित व्यक्तियों का निर्वासन तुरंत रद्द करने की मांग की गई प्रजामण्डत की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने 30 मई , 1938 को एक नियम प्रसारित करके किसी भी गैर पंजीकृत संस्था द्वारा सभा - सम्मेलन करना व उसका सदस्य बाना अवैध घोषित कर दिया । सरकार ने राज्य कर्मचारियों व उनके आश्रितों के राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया तथा सभाओं व जुलूसों पर भी रोक लगा दी । 16 दिसम्बर , 1938 को जमनालाल बजाज के जयपुर प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया । फरवरी , 1939 को बजाज ने राज्याज्ञा का उल्लघन कर जयपुर में प्रवेश किया । फलतः उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया । उसी रात्रि का होगलाल शास्त्रो , चिरंजीलाल , हरिशचन्द्र , कपुरचन्द्र पाटनी और हंस डी . राय का लोक कहा । नहीं - 1939 को गांधीजी की सलाह गिरफ्तार कर लिया गया । लेकिन प्रजामण्डल का सत्याग्रह समाप्त होने की जगह मात पकड़ गया । हजारों की संख्या में पुरुषों और महिलाओं ने सत्याग्रह में भाग लिया । गिरफ्तार हुए और पुलिस के अत्याचार सहे । मार्च 1910 को गांधीजी का सत पर सत्याग्रह स्थगित कर दिया गया । अतः राज्य माकाने अगस्त , 1939 क सत्याग्रहिया कोला से मुक्त कर प्रजामण्डल को मान्यता प्रदान कर दा और 25 मई , 1910 को प्रजामण्डल के अधिवेशन में जमनालाल बजा शासन स्थापित कारको मांग को पुनः दोहराया तथा शेखावाटी के किसा को समर्थन दिया । नवम्बर , 1941 में सीकर में प्रजामण्डल के तीसरे नादायी शासन की मांग पुनः उठाई गई । इसी मध्य प्रजामण्डल कार्यक ने पर चिरंजीलाल ने ' प्रभामण्डल प्रगतिशील दल ' का गठनक जामण्डल कुछ कमाएमा अत : सरकार ने प्रजामण्डल की मांगा भी प्रजामण्डल को एक मजमनालाल बजाज ने उत्तरदायी बावाटी के किसान आंदोलन क तीसरे अधिवेशन में प्रजामण्डल कार्यकारिणी से मतभेद के सदन कार्यरत मारवाद दल ' का गठन कर लिया । अत : मण्डल की मांगों की उपेक्षा कर हीरालाल शारी ल को धक्का लगा । पन प्रजामण्डल महाराजा स जैसे का काकाकी . 1942 मीनार के देहांत अगस्त , 1 . 2 करत होतो आंदोलन के दौरान प्रजामण्डल सादापोरालयकोको भोग कीजियपाशाजधानमंत्री मिज पालमा राज्य शोधही उत्तरदायी शासन स्था आप्रवासन दिया . ममपहल आंदोलन नहीं लेना बाम mon और रंगटी राय जो प्रजामण्डल नमत्री मिर्जा इस्माईल सन स्थापित करने छड़ा ।

राजस्थान में वेडिंग

1.राजस्थान में वेडिंग के लिए अच्छी और खूबसूरत जगह हम बताते हैं आपको
 मैं राजस्थान से रहने वाला हूं यहां बहुत सारी खूबसूरत जगह है जहां पर हम वेडिंग को और भी खूबसूरत बना सकते हैं इंडिया का एकमात्र जगे राजस्थान है जो दुनिया भर में प्रसिद्ध माना जाता है अगर आप शादी का प्लान  बना रहे हैं तो तो राजस्थान बहुत ही महत्वपूर्ण जगह है यहां पर लोग भी विदेशों से चल कर राजस्थान के अंदर बहुत सारी जगह है अक्सर लोग यहां पर आकर धूमधाम से शादी जशन का लुफ्त उठाते हैं और यहां पर काफी प्राचीन काल से यह परंपरा देखने को मिली है अब हम आपको बताते हैं की यहां पर कौन-कौन सी जगह है जहां पर शादी को और भी खूबसूरत बना बनाया जा सकता है

2. राजस्थान का एकमात्र जगह उदयपुर.
 यह वह जगह है जहां हर कोई चाहता है कि मेरी शादी उदयपुर में हो क्योंकि यहां वह सारी सुविधाएं देखने को मिलती है और यहां पर बहुत ही खूबसूरती और हरियाली देखने को मिलती है यहां बहुत बड़े इवेंट्स भी रहते हैं जो शादी की प्लानिंग को और भी सरल तरीके से बहुत ज्यादा खूबसूरत बनाते हैं यहां पर बहुत सारी होटल रिसोर्ट जो बहुत ही पहाड़ियों से घिरी हुई है और यहां पानी का नजारा जहां पर शादी को बहुत ही और भी खूबसूरती देखने को मिलती है यहां बहुत सारी सेलिब्रेट बॉलीवुड के हीरो वगैरा ज्यादातर यह जगह ज्यादा पसंद करते हैं

 3.पुष्कर इवेंट राजस्थान.
 यह वह जगह है जो कि अजमेर जिले के पुष्कर जो पूरे विश्व के अंदर विख्यात रूप से प्रसिद्ध माना जाता है और यहां पर बहुत सारे सेलिब्रेट और शादियां बहुत सारी शादियां होती है यहां पर लोग विदेशों से लेकर भारत के अलग-अलग राज्यों से आकर यहां पर शादी का मैनेजमेंट करते हैं यह भी एक प्रसिद्ध जगह है हर कोई यहां आकर अपनी शादी की प्लानिंग करता है और यहां आकर शादी करते हैं यहां पर बहुत पहाड़िया झरने होटल वगैरा रिसोर्ट गार्डन और अच्छे इन्वेंटर और सारी सुविधाएं पुष्कर शहर में मिल सकती है यहां पर भी बॉलीवुड की बहुत सारी हस्तियां यहां आकर सेलिब्रेट करते हैं

4. जोधपुर राजस्थान.
 राजस्थान का एकमात्र बहुत बड़ा शहर है और राजस्थान का दूसरा बड़ा शहर है यहां पर भारत के राज्यों से बड़े-बड़े शहरों से विदेशों से लोग इस जगह को बहुत ज्यादा पसंद करते हैं और यहां आकर शादी को सेलिब्रेट करते हैं और यहां पर बहुत सारी बहुत बड़ी-बड़ी बॉलीवुड हस्तियां यहां आकर शादी की सेलिब्रेशन और साथी ही  वेडिंग को ज्यादा पसंद करते हैं इसलिए यहां के बड़े-बड़े रिसोर्ट प्लेस यहां का सबसे बड़ा प्लेस उमेद पैलेस है जो बहुत ज्यादा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है यह भी बहुत अच्छी जगह है शादी के लिए.

5. जयपुर राजस्थान.
 राजस्थान की राजधानी जयपुर जो कि महानगर के रूप में जाना जाता है इसे गुलाबी नगरी भी कहते हैं पूरे विश्व के अंदर भारत के अंदर बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है यहां पर बहुत सारी खूबसूरत जगह शादी के लिए लोग बाहर से आकर जयपुर को एक अच्छी जगह मानते हैं यहां पर हर साल बहुत बड़ी बड़ी शादियां होती है यहां पर भारत के सभी राज्यों से चल कर यहां शादी की इवेंट की प्लानिंग करते हैं बॉलीवुड और हॉलीवुड के सेलिब्रेशन भी बहुत सारे होते हैं वेंडिंग प्लेस रिसोर्ट गार्डन होटल बड़े-बड़े महल है  जिसमें बहुत सारी शादियां होती है जयपुर यह एक शादी के लिए महत्वपूर्ण जगह है

How to Stay always Happy?


Friends should be happy always and the biggest benefit of being happy is that if you stay the same then you will get the highest amount of money and you will look happy, so I will tell you in the speed post how you will always be happy.



The first thing you have to consider is what I am going to tell you below. First of all, you have to stop listening to the people around you and after that you have to do whatever you want to do by listening from your heart. If your heart is doing you to do something, then you will definitely do that work. If your heart is refusing to do any work, then you don’t have to do it at all. If you always keep these things in your mind that yes brother, I have to do what my heart is saying, then you will always get to see the best. Below I am going to give you something that if you try to be more happy then you will definitely come then that post is great.
Friends, there are some things that you have to understand in which the first thing is that you have to ignore the things of people around you or if someone says something to you. If there are good things to be learned from them, if there are any bad things, do not learn them at all. Because if you see something good, then you get the benefit of it.
The first thing is that you will always have to be good yourself, the most important thing is that you have to be okay with yourself and after that you will have to keep cleanliness around you and use water properly and save electricity as well. The routine of eating and living must also be corrected. If you correct your routine then you will get to see the result. The result is that you will find great ideas.
What is the question in the minds of many people, how can I work, man? After all, how do I make sense in my work? How do I mean my work, then I want to tell those people that first of all you should love your work. You should have a passion for your work, only then you will be able to make sense of your work and the biggest result of your work means that you will always be happy, you will never feel any pain when you are just about your work. If you think about it then you also get your lunch. If there is a goal, then you can achieve it. That is why I do this to people. I tell you that how he can think of himself is very important.
Friends, the most important thing is that when you work, then you should have an attachment to work and at the same time you just have to concentrate on your work. When you focus on your work, you will get success. Above all, I was trying to tell how you are answering your work first of all, then make your phone silent and after that whatever Message whatsapp.
So you have to keep these following things in mind at the same time and also you have to make a little distance from your friends, because your friends will never think of you that you will progress, they will always keep trying to bring you down but not below you Fall is always your job. You always have to pay attention that we have to move forward, we have to get ahead, we have to become a successful person, if you have such thinking then you will always be happy and the biggest reason for your happiness will be that you have to be the greatest person.
Five reasons to be happy.
Friends, every person is happy, there is a reason behind it. There is some reason. To be happy with him, today I am going to tell you below that what could be the five reasons for you to be happy so that you can keep yourself happy, then let us consider the reasons given below.
  1. Your Aim
Your goal is also a very big reason. If you have something to keep you happy, then the biggest reason is behind it. Your goal: You are always engaged in achieving that goal. For this reason you never see any problem. The biggest result of this will come to you is that when you are always conscious of your goal, then you will not pay attention to anything else that will not make you unhappy and you will always feel happy.
  1. Your Work
Yes friends, your work is also a big reason to be happy, so go on doing your work and you do not pay attention here. What is the world doing? Do not think that just do your work, be fun and let the people around you And keep on helping the people around you.
This is the biggest thought of life.
  1. Your Passion
Friends, your passion also adds to your happiness. If you lie too much money on something. If you have too much identity about that thing then you will definitely be happy. You will work with both a heart and a mind to do that work and your work will also be successful because if you are a money net then always keep yourself passionate so that you can move forward and do not think of you for progress.
  1. Your Name
Your name is also enough to keep you happy. Because when you think about your name, after all, why did my name read this, why is my name like this, you will think and laugh like it.
Just like my name is Peter, people call me by the name of Peter Pan, people do not know why the cry is dead because of my name, man, they think that I know very boss typing and that is it.
Before growing, before eating, you have to think a little about yourself, think about your name.
  1. Your Life
You will be very happy thinking about your life too, the biggest reason behind that is that you are very serious about your life, you think that we will not work in our life, then we will How will we be able to move forward? We have to do good duty. We have to help people who help people, they also help us, so if you want to keep this one the greatest happy, then you have to consider all those things as well.
Conclusion
Last word I want to say is that in order to keep yourself happy you have to keep others happy as well, as long as you are not involved in the happiness of others, then you cannot keep yourself happy, so that is why you are happy people first After that, you always feel happy after singing, then if you have understood my words, then I will tell you by commenting below how you felt about me, are you happy or not? I hope you will be happy after reading this.

How to Make Girlfriend?


Friends, in this post, I will tell you how you can make girlfriends. Friends, you have to pay attention to written things for this. First of all, you have to choose the girl who will be your girlfriend, for that it will be better that you always hear Your heart.



First of all send it to your WhatsApp. Because how good behaviour will be for you and if you do not do your behaviour well then you will have to face a lot of problems later, then first of all you fix your behaviour and then yourself.
Improve your food and drink because everyone loves good food. I love too. I also want to eat good food. But people do not let me eat good food. I do not know I am still hungry, yet bread is made but still I am not making vegetables, so you can understand how much trouble this mad man was learning by burning fire, so he says if not hurting me, I told you That man, when a man takes something with the wrong pollution, then the problem happens. That is why I tell you that if you always come forward, you will get the wood.
Now the second step is that you have to use your phone. Whenever someone in front of you, you take out your phone and put it in your ear to see that I am busy I am talking to a friend. Whereas in reality your call is not connected to anyone, you fool people, but this is the foolish thing that makes people feel good that this man was always engaged at work, he goes to work, people do not think that he Are working That is why I want to tell you to always keep your phone in your ear and say that I am busy now.
Let’s not talk about laptops, you don’t have to keep the laptop in your pocket forever. You always have to keep it in your bag so that people feel that yes he has a laptop brother, this money boy, man, this is a very nice man. How does it work what is it not doing.
In the evening, you have to take a little serious and after that you have to show that you are a responsible person. You are taking up the responsibilities only then you will not get a girl or you will not be able to do so I tell you one thing that whenever you talk to someone, talk well and talk in a different style. Everything should be different in the way people say that I mean I am an alcoholic but you feel like a good person if not man. I am a very nice person. I never take any wrongdoing and always support people. I am a human being I am a very kind person to show you as if people will see that you are a good person then they will be happy and they will be you, after that your work will start.
conclusion
The last word I would like to say is that if there is such food in life? If you want to have a Vicky girlfriend, then you have to change your thoughts, you have to be a good person because only a matter of good people can be made, you have to be a good person, you have to take some responsibilities, you have to work as well as your money. You will also have to earn because people who earn money give value to them, that is why you should never be disappointed with work. Have been engaged for work and are pursuing their goals. Because only by being engaged in achieving the goal, people will consider you as a responsible person and help your home, help people around you. This will make people understand you as a helpful kind person, I hope you have liked all these things, if you have liked it, then you will definitely tell us the comment below and also tell us how you have made it so that I will keep my future posts. If you have any question after clearing all the things in the people, then also tell them in the comments below, we will be very happy to help you.

How to Make Chair?


Friends, in which post I will tell you how you can make a wooden chair? It is very easy and the biggest thing is that it is not very difficult to make a chair. It is a very easy task, just for this you have to take care of two or three things that you have to keep the.



chair you are making clean. He has to be maintained properly so that he keeps going for years because what happens is that when you make a chair, you are not able to give time to clean that chair even now. As a result, the chair that is yours starts to darn in a very short time. If you start standing then that’s why I am going to tell you below how you will make this chair?
How Much we Need Woods
First of all you need wood, I have your chair, it is made of wood. That is why you need some wood to make a chair as well as some cartoons. You will pick wood from the forest. If you do not have a forest, then you were not standing by anyone that when you buy this wood, then you have to cut this technique in a good way because it is rectangular.
After cutting into the rectangular shape, clean the wood. With Suresh work from a dweller you have to clean it and after that cut this wood in a good design in which day you have to make a chair. First of all, you have to make four for the chair, which is very important, after making 4 seats, you will make after that you will have to apply a little oil on it, which will be oil, you will fly by making a wooden oil in the market. I will be found anywhere. After applying it, you will have to eat it for a while when it dries, then use fevicol again. After applying fevicol, apply it a little more in the sun.
After understanding all these things, you can start your work. Now you have to connect the timbers together. After connecting Lucknow, you make it a little distance and were to dry it a little bit and when it dries well then a sound will come out of it which will be like the sound cut after the cut. What you have to do is to keep it on the side. Now after that you have to add the two elements and after joining, you have to create a separate one, whose name is sitting plate.
After making the setting plate, you will have to give a little design in that setting plate, the setting plate with its design is going on a lot, you can also put a cut design in it which will look completely different and unique in this design If you fill color, it will bloom even more, you can use wooden color in color. Wooden color is very much in train nowadays. If you use it, it seems to look great and at the same time there is a lot of benefit, if you use wooden paint, then you will never have a problem. Never a caterpillar will be able to spoil this thing of yours and with this you have to protect it from the rain, when you tell it from the rain, then the best result of it is that your wood will never run which will be very important and will last.
Now you have to make the wood that the chair is ready to paint it a little bit, how are you going to paint it? I am discussing about three to four boys, the girl is moving a lot. To paint. After that the chair has to be colored with a little blue color as well. When you do this, you will see your Kurti red blue color in 3D design.
This is very good and people will also like the design of your chair in this way, you have learned how to make a chair now? Is very easy. A chair is made in a very simple way. There is nothing to do or not, just follow the above mentioned things and your chair will be ready. I hope you have learned a little bit about making a chair.
Conclusion
In the last word, you will say that your chair looks very beautiful now. Now you have to work on it a little bit and whatever is the meaningful part of it you have to do a little. After that this work will start and it will look very good, people will like this chair and you will remain like this for many years when this chair is kept a little safe.